गुरुवार, 16 जुलाई 2020

क्या पायलट भर पाएंगे राजनीति की उड़ान...!


राजस्थान आजकल खासा चर्चा में है। वहां की गहलोत सरकार में उप-मुख्यमन्त्री व प्रदेश अध्यक्ष रहे सचिन पायलट ने जिस तरह से अपने बगावती तेवर दिखाएं हैं उससे राजस्थान की राजनीति व कांग्रेस में उथलपुथल मच गई है। यद्यपि अभी तक सचिन पायलट ने अपना अगला कदम स्पष्ट नहीं किया है किन्तु फ़िर भी उनके राजनीतिक भविष्य को लेकर राजनीति के पण्डितों से लेकर ज्योतिष के जानकार तक सभी अपने-अपने ज्ञानानुसार कयास लगा रहे हैं। आईए हम भी "वेबदुनिया" के पाठकों के लिए प्रस्तुत कर रहे हैं सचिन पायलट की कुण्डली का ज्योतिषीय विश्लेषण-
* सचिन पायलट की कुण्डली-
 सचिन पायलट की कुण्डली सिंह लग्न व मिथुन राशि की है। लग्न में सूर्य, बुध व शनि स्थित हैं। एकादश भाव अर्थात् लाभ स्थान में चन्द्र, मंगल व गुरू की युति है। दशमेश शुक्र व्यय भाव में विराजमान हैं। राहु-केतु क्रमश: दूसरे व आठवें भाव में स्थित हैं।
* सचिन पायलट की कुण्डली के शुभाशुभ योग-
सचिन पायलट की कुण्डली बुधादित्य योग, महालक्ष्मी योग व गजकेसरी जैसे राजयोग विद्यमान है जिसके फ़लस्वरूप उन्हें बहुत ही कम आयु में इतनी सफलता प्राप्त हुई। सिंह राशि का जातक सदैव स्वाभिमानी व तेजस्वी स्वभाव वाला होता है। सिंह राशि के जातक का नैसर्गिक स्वभाव होता है कि वह किसी के अधीनस्थ होकर कार्य नहीं कर सकता जो सचिन पायलट के तेवरों से स्पष्ट जाहिर होता भी है। महालक्ष्मी योग उन्हें धनाढ़्य बना रहा है वहीं वाणी स्थान में स्थित बुध उनकी वाणी में तर्क प्रदान कर रहा है। ऐसा जातक कभी भी अतार्किक बात का समर्थन नहीं करता। ऐसे जातकों को केवल योग्य तर्क के द्वारा ही सहमत किया जा सकता है किन्तु ऐसे जातक अपनी तर्कयुक्त वाणी के कारण कभी-कभी गंभीर हानि भी उठाते हैं। सचिन पायलट की कुण्डली में सभी ग्रह राहु-केतु की परिधि में होने से उनकी कुण्डली में "कुलिक" नामक कालसर्पयोग का निर्माण भी हो रहा है जो उन्हें जीवन अपेक्षित सफलता से वंचित करेगा। उन्हें सफलता प्राप्ति हेतु कठोर संघर्ष करना होगा।
* पायलट का राजनीतिक भविष्य-
सचिन पायलट की कुण्डली की ग्रहस्थितियों के अनुसार सूर्य का अपनी स्वराशि सिंह में स्थित होना उनकी राजनीति में सफलता को दर्शाता है क्योंकि सूर्य राजसत्ता का प्रतीक होता है वहीं जनता व शासन का प्रतीक शनि भी सूर्य के साथ स्थित है जो उनके राजनीति में महत्वपूर्ण पदों की प्राप्ति का संकेत करता है किन्तु दशमेश शुक्र का शत्रुक्षेत्री होकर व्यय भावगत होना उनके कर्मक्षेत्र में अवरोध का द्योतक है। वहीं उनके कर्मक्षेत्र पर राहु की पूर्ण दृष्टि उन्हें अपने कर्मक्षेत्र में अपेक्षित सफलता प्राप्त करने के लिए कड़ा संघर्ष करने का संकेत दे रही है। जीवन में कई बार वे राजनीति के शीर्ष पर पहुंचते-पहुंचते सत्ता से दूर रह सकते हैं। राजयोग के कारण वे राजनीति के केन्द्र में तो रहेंगे किन्तु मुख्यमन्त्री की कुर्सी तक पहुंचने के लिए उन्हें अभी प्रतीक्षा के साथ-साथ कठोर संघर्ष से गुजरना होगा।
*विंशोत्तरी दशाओं का संकेत-
अभी वर्तमान में सचिन पायलट शनि की महादशा व दशमेश शुक्र की अन्तर्दशा के प्रभाव में हैं वहीं प्रत्यन्तर दशा गुरू की है। जैसे हमने पूर्व में स्पष्ट किया था राहु की दृष्टि उनके कर्मक्षेत्र के लिए हानिकारक है ठीक उसी प्रकार सचिन पायलट पर जनवरी से चली आ रही राहु की प्रत्यन्तर दशा विगत 1 जुलाई को ही समाप्त हुई है। सुधि पाठकगण इस बात को शीघ्र ही समझ लेंगे कि वर्तमान में सचिन पायलट के साथ जो घटनाक्रम हुआ जिसके कारण उन्हें अपना उप-मुख्यमन्त्री व प्रदेश अध्यक्ष का पद गंवाना पड़ा उसका बीजारोपण राहु की प्रत्यन्तर दशा में ही हो चुका था। यदि विंशोत्तरी दशाओं का समेकित विश्लेषण कर निष्कर्षत: कहें तो वर्तमान से लेकर वर्ष 2023 तक का समय सचिन पायलट के लिए अनुकूल है। इस अवधि में वे अपनी राजनीति की नई दिशा तय करेंगे। वर्तमान से लेकर वर्ष 2023 तक का समय सचिन पायलट के लिए सफलतादायक प्रतीत हो रहा है किन्तु इस समय का यथोचित लाभ प्राप्त करने के लिए उन्हें अशुभ योगों विशेषकर राहु व कालसर्प दोष की शान्ति करवाना आवश्यक है अन्यथा वे इन दुर्योगों के कारण पुन: सत्ता के शीर्ष पर पहुंचने से वंचित रह सकते हैं।

(निवेदन-उपर्युक्त विश्लेषण सचिन पायलट की उपलब्ध कुण्डली के आधार पर दिया गया है। हम इस कुण्डली की प्रामाणिकता का दावा नहीं करते हैं।)

-ज्योतिर्विद् पं. हेमन्त रिछारिया
प्रारब्ध ज्योतिष परामर्श केन्द्र
सम्पर्क: astropoint_hbd@yahoo.com




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