उठि प्रभात सुमरियै, जै श्री गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा॥
अन्धन को नेत्र देत, कुष्ठी को काया।
बन्ध्या को पुत्र देत, निर्धन को माया॥
एकदन्त दयावन्त, चार भुजा धारी।
मस्तक सिन्दूर सोहै, मूसक असवारी॥
फूल चढ़ै पान चढ़ै, और चढ़ै मेवा।
मोदक को भोग लगे, सुफल तेरी सेवा॥
रिद्धि देत सिद्धि देत, बुद्धि देत भारी।
"तानसेन" गजानन, सुमिरौ नर-नारी॥



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