आईए जानते हैं कि ये "साढ़े तीन" या "अबूझ" मुहूर्त्त कौन से
होते हैं-
"स्वयंसिद्ध मुहूर्त्त" या "अबूझ मुहूर्त्त"
1. चैत्र शुक्ल प्रतिपदा (गुड़ी पड़वा/चैत्र नवरात्रि घट स्थापना/हिन्दू वर्षारम्भ)
2. वैशाख शुक्ल तृतीया (अक्षय तृतीया/अखातीज)
3. आश्विन शुक्ल दशमी (विजयादशमी/दशहरा)
4. कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा का अर्द्धभाग
उपर्युक्त मुहूर्त्तों में चैत्र शुक्ल प्रतिपदा, वैशाख शुक्ल तृतीया, आश्विन शुक्ल दशमी पूर्ण दिवस एवं कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा का अर्द्धभाग शुभ होने से इन्हें "साढ़े तीन" मुहूर्त्त भी कहा जाता है।
विवाह मुहूर्त्त में कार्तिक पूर्णिमा का विशेष नियम-
शास्त्रानुसार "स्वयंसिद्ध" या "अबूझ" मुहूर्त्त के अतिरिक्त
विवाह में कार्तिक पूर्णिमा को विशेष मुहूर्त्त के तौर पर मान्य किया जाता है। जब विवाह
का शुद्ध मुहूर्त्त ना बन पा रहा तो कार्तिक पूर्णिमा के पूर्व व पश्चात् के पांच दिन
विवाह के लिए उपयुक्त माने गए हैं। यहां तक कि कुछ विद्वानों ने तो इन मुहूर्त्तों
में त्रिबल शुद्धि व गुरू-शुक्रास्त को भी विचारणीय नहीं माना है लेकिन यह मुहूर्त्त
केवल "आपातकाले मर्यादा नास्ति..." के सिद्धान्त अनुसार कुछ विशेष
परिस्थितियों में ही ग्राह्य होते हैं।
"गोधूलि लग्न" की ग्राह्यता-
मुहूर्त्त शास्त्र में "गोधूलि" लग्न को "स्वयंसिद्ध" मुहूर्त्त
के तौर पर मान्यता प्रदान की गई है। जब विवाह का दिन सुनिश्चित हो जाए और पाणिग्रहण
हेतु शुद्ध लग्न की प्राप्ति ना हो तो "गोधूलि" लग्न की ग्राह्यता शास्त्रानुसार
बताई गई है। "गोधूलि लग्न" सूर्यास्त से 12 मिनिट पूर्व एवं पश्चात् कुल
24 मिनिट अर्थात् 1 घड़ी की होती है, मतान्तर से कुछ विद्वान से इसे
सूर्यास्त से 24 मिनिट पूर्व व पश्चात् कुल 48 मिनिट का मानते हैं लेकिन शास्त्र का
स्पष्ट निर्देश है कि "गोधूलि लग्न" की ग्राह्यता केवल आपात परिस्थिति में
ही होती है जहां तक सम्भव हो शुद्ध लग्न को ही प्राथमिकता देना चाहिए।
-ज्योतिर्विद् पं. हेमन्त रिछारिया
प्रारब्ध ज्योतिष परामर्श केन्द्र
सम्पर्क: astropoint_hbd@yahoo.com

