गुरुवार, 14 मई 2020

शास्त्रानुसार क्या है मृत्यु का अर्थ-


शास्त्र के सूत्रों और वचनों को यदि भलीभांति व सही परिप्रेक्ष्य में ना समझा जाए तो वे लाभप्रद होने के स्थान पर हानिकारक भी सिद्ध हो सकते हैं। अक्सर उचित एवं सटीक व्याख्या ना होने पर अर्थ का अनर्थ कर शास्त्रों के सूत्रों व निर्देशों के प्रति भ्रांतियां निर्मित कर दी जाती हैं। आज हम "वेबदुनिया" के पाठकों ज्योतिष की मारकेश दशा से सम्बन्धित एक महत्त्वपूर्ण जानकारी दे रहे हैं। अधिकांश जनमानस ज्योतिष की दो दशाओं के आने पर अत्यधिक भयाक्रान्त होता है-शनि की साढ़ेसाती एवं मारकेश की दशा। मारकेश की दशा के सम्बन्ध में अक्सर यह भ्रान्ति प्रचलित है कि इस दशा में जातक की मृत्यु घटित होती है जबकि यह तथ्य पूर्णत: सत्य नहीं अपितु आंशिक सत्य है। क्योंकि ज्योतिष शास्त्रानुसार मृत्यु का अर्थ केवल प्राणहानि ही नहीं होता। शास्त्र का वचन है-
"व्यथा दु:खं भयं लज्जा रोग: शोकस्तथैव च।
बन्धनं चापमानं च मृत्युचाष्टविध: स्मृत:॥
उपर्युक्त सूत्रानुसार शास्त्र आठ बातों को मृत्यु के सदृश मानता है, ये हैं- व्यथा, दु:ख, भय, लज्जा, रोग, शोक, बन्धन, अपमान अर्थात् यदि किसी जातक पर "मारकेश" की दशा प्रभावशाली हो और उसकी आयु हो तो "मारकेश" की दशा में प्राणहानि ना होकर उसे इस दशा में केवल अत्यधिक कष्ट का सामना करना पड़ेगा।

-ज्योतिर्विद् पं. हेमन्त रिछारिया
प्रारब्ध ज्योतिष परामर्श केन्द्र
सम्पर्क: astropoint_hbd@yahoo.com


रविवार, 3 मई 2020

क्या ज्योतिष की दृष्टि से आप हैं "ग्रीन जोन" में...!

  
आज समूचा विश्व "कोरोना" नामक महामारी से पीड़ित हैं। संसार के सभी देश अपने-अपने तरीकों से इस वैश्विक महामारी से निपटने का प्रयास कर रहे हैं। इस समय अनेक देशों ने स्थानीय स्तर पर तालाबन्दी अर्थात् "लाकडाउन" किया हुआ है। भारत में भी पिछले एक माह से "लाकडाउन" चला आ रहा है। "कोरोना" वायरस से निपटने के लिए अभी तक कोई कारगर ईलाज नहीं खोजा जा सका है, और ना ही "कोरोना" के स्वभाव का कोई ठीक-ठीक अनुमान लगाया जा सका है। इस वायरस ने सभी को प्रभावित किया है, चाहे वह 6 माह की बच्ची हो, 25 वर्ष का युवा हो, 40 वर्ष का प्रौढ़ हो, या 60 से 80 तक की आयु के वृद्ध। "कोरोना" से हुई मौतों में भी हमें असमान्य नियम देखने को मिला है जहां एक ओर तो 40 वर्षीय प्रौढ़ "कोरोना" की जंग हार कर काल के गाल में समा गए वहीं 90 वर्षीय वृद्ध "कोरोना" को शिकस्त देकर पूर्ण स्वस्थ हो गए। अब प्रश्न यह उठता है कि ऐसा क्यों हुआ? यदि हम इस बीमारी से संक्रमित होने वाले व्यक्ति एवं इससे ग्रसित होकर स्वस्थ होने वाले व्यक्तियों व इससे प्रभावित होकर प्राण गंवा देने वाले व्यक्तियों को रेड, आरेंज व ग्रीन; तीन ज़ोन में विभक्त कर ज्योतिषीय आधार पर इसका विश्लेषण करने का प्रयास करें तो हम हमारी सर्तकता व सावधानी की दिशा में एक कदम ओर अग्रसर हो सकेंगे। ज्योतिष शास्त्र में किसी जातक के किसी रोग से पीड़ित होने व उस रोग से उसकी प्राणहानि होने के जोखिम के संकेत उसकी जन्मपत्रिका के अवलोकन के आधार पर मिलते हैं।
रोग का अधिपति ग्रह "षष्ठेश" -
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ज्योतिष शास्त्र में कुण्डली के छठे भाव को रोग का भाव माना गया है एवं इसके अधिपति ग्रह जिसे "षष्ठेश" कहा जाता है, रोग का अधिपति ग्रह माना गया है। यदि किसी जातक पर "षष्ठेश" की महादशा या अन्तर्दशा चल रही हो तो वह निश्चित ही किसी ना किसी रोग से पीड़ित होगा। जन्मपत्रिका में "षष्ठेश" रोग का पक्का कारक होता है। अत: यदि कोई जातक जन्मपत्रिका के अनुसार "षष्ठेश" की महादशा या अन्तर्दशा भोग रहा है तो वह अवश्य ही रोग से पीड़ित हो जाएगा। यदि "षष्ठेश" जन्मपत्रिका के किसी शुभ या लाभ भाव में स्थित हो तो ऐसे में रोगग्रस्त होने की संभावना बढ़ जाती है। ऐसा जातक शीघ्र ही रोग से मुक्त नहीं होता।

"मारकेश" की दशा देती है मृत्युतुल्य कष्ट-
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संसार में जिसने जन्म लिया है उसकी मृत्यु होना अवश्यंभावी है लेकिन यह मृत्यु कब होगी इसका स्पष्ट संकेत भी ज्योतिष शास्त्र से मिल सकता है। जन्मपत्रिका के द्वितीयेष, सप्तमेष व द्वादशेष मारकेश ग्रह माने गए हैं इनमें द्वितीयेष व सप्तमेष को प्रबल मारकेश माना गया है। ज्योतिष में "मारकेश" मृत्यु देने वाला ग्रह होता है। यदि मारकेश शनि, मंगल, सूर्य, जैसे क्रूर ग्रह हों या "मारकेश" ग्रह राहु-केतु से संयुक्त हों तो यह अधिक हानिकारक हो जाते हैं। मारकेश की महादशा या अन्तर्दशा में जातक मृत्युतुल्य कष्ट पाता है और यदि आयु पूर्ण हो चुकी हो तो ऐसे में जातक की इन दशाओं में मृत्यु होना भी सम्भव है।


क्रूर ग्रह की दशा होती है हानिकारक-
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उपर्युक्त दशाओं के अतिरिक्त क्रूर ग्रहों जैसे अष्टमेश व राहु-केतु की दशाएं भी जातक के स्वास्थ्य व जीवन के लिए हानिकारक सिद्ध होती हैं। उपर्युक्त ग्रह स्थितियों व दशाओं के आधार पर यदि हम जातकों को तीन जोन में विभक्त करें तो आईए जानते हैं कि ज्योतिष की दृष्टि से आप किस जोन में कहे जाएंगे-
1. ग्रीन जोन- सर्वप्रथम हम ज्योतिष के ग्रीन जोन वाले जातकों का विश्लेषण करते हैं। यदि आपकी जन्मपत्रिका के अनुसार वर्तमान में आप "षष्ठेश", "मारकेश" व "क्रूर ग्रह" की महादशा, अन्तर्दशा या प्रत्यन्तर दशा के प्रभाव में नहीं हैं और आप पर किसी शुभ ग्रह की महादशा, अन्तर्दशा या प्रत्यन्तर दशा चल रही है तो आप सुरक्षित अर्थात् "ग्रीन जोन" में माने जाएंगे।
2. ओरेंज जोन- यदि आपकी जन्मपत्रिका के अनुसार वर्तमान में आप पर "षष्ठेश", या किसी "क्रूर ग्रह" की महादशा, अन्तर्दशा या प्रत्यन्तर दशा चल रही है किन्तु "मारकेश" की महादशा-अन्तर्दशा व प्रत्यन्तर दशा से आप प्रभावित नहीं हैं अथवा आप केवल "षष्ठेश" या किसी "क्रूर ग्रह" की प्रत्यन्तर दशा भोग रहे हैं। यदि आपका "षष्ठेश" 6,8,12 जैसे हानि स्थान में हो एवं आप पर किसी शुभ ग्रह की महदशा या अन्तर्दशा चल रही हो तब आप "ओरेंज जोन" में माने जाएंगे।
3. रेड जोन-यदि आपकी जन्मपत्रिका के अनुसार वर्तमान में आप "षष्ठेश", "मारकेश" व "क्रूर ग्रह" की महादशा, अन्तर्दशा या प्रत्यन्तर दशा के प्रभाव में है और आप पर किसी शुभ ग्रह की महादशा, अन्तर्दशा या प्रत्यन्तर दशा नहीं चल रही है एवं आप "मारकेश" की महादशा या अन्तर्दशा के प्रभाव में हैं तो आप अत्यन्त असुरक्षित अर्थात् "रेड जोन" में माने जाएंगे। यदि किसी जातक पर वर्तमान में महादशा (मारकेश/षष्ठेश), अन्तर्दशा ((मारकेश/षष्ठेश) व प्रत्यन्तर दशा (मारकेश/षष्ठेश/क्रूर ग्रह) का संयोग बन रहा हो तो ऐसे जातक को अत्यन्त सावधान व सर्तक रहने की आवश्यकता है। पूर्व वर्णित विंशोत्तरी दशाओं के साथ यदि जातक पर "संकटा" नामक योगिनी दशा चल रही हो तब ऐसा जातक निश्चित रूप से "रेड जोन" में माना जाएगा।

(निवेदन- उपर्युक्त विश्लेषण जिज्ञासु व ज्योतिष शास्त्र में रुचि रखने वाले पाठकों को केन्द्र में रखकर प्रस्तुत किया गया है। पाठकों की व्यक्तिगत जन्मपत्रिका की ग्रहस्थिति एवं दशाओं के आधार पर उनका स्वास्थ्य सम्बन्धी जोखिम कम या अधिक हो सकता है। अत: पाठकों से अतिविनम्र निवेदन है कि वे किसी भी प्रकार की स्वास्थ्य सम्बन्धी असावधानी व लापरवाही से बचें। उपर्युक्त आलेख को केवल सामान्य जानकारी तक ही सीमित रखें व इसके आधार पर स्वास्थ्य सुरक्षा सम्बन्धी निर्णय ना लें।)

-ज्योतिर्विद् पं. हेमन्त रिछारिया
प्रारब्ध ज्योतिष परामर्श केन्द्र
सम्पर्क: astropoint_hbd@yahoo.com