रविवार, 17 नवंबर 2019

आस्था या अन्धविश्वास....!

कहते हैं आस्था व श्रद्धा को किसी तर्क या प्रमाण की आवश्यकता नहीं होती। लोगों की किसी के प्रति आस्था ही उनके विश्वास का पर्याय होती है किन्तु जब यही आस्था एक सीमा का उल्लंघन कर सामाजिक ताने-बाने का अतिक्रमण करने लगती है तब यह अन्धविश्वास बन जाती है। इन दिनों मध्यप्रदेश के होशंगाबाद जिले की पिपरिया तहसील का नयागांव ऐसे ही एक अन्धविश्वास का केन्द्र बना हुआ है। पिछले कुछ दिनों में यहां के सतपुड़ा टाइगर रिज़र्व के जंगल में लगा हुआ एक "महुआ का पेड़" अपनी तथाकथित चमत्कारिक शक्तियों को लेकर चर्चा में आया। माना जा रहा है कि इस महुआ के पेड़ में कोई चमत्कारिक शक्ति है और इस पेड़ को छूने मात्र से असाध्य रोग भी ठीक हो जाते हैं। इस प्रकार की चर्चा के फैलते ही यहां दूर-दूर से लोग अपने असाध्य व गंभीर रोगों से मुक्ति पाने के लिए इस पेड़ को छूने आ रहे हैं। अब हालात इस कदर बेकाबू हो चले हैं कि लोगों की बढ़ती भीड़ को देखते हुए प्रशासन को यहां भारी पुलिस बल तैनात करना पड़ा है। इन तमाम प्रशासनिक इंतजामों के बावजूद भी बीति रात यहां अराजतकता वातावरण देखने को मिला। प्रशासनिक व्यवस्थाओं व प्रतिबन्धों से नाराज़ ग्रामीणों व पुलिस के बीच झड़प व पत्थरबाजी की घटना हो गई जिसमें टी आई सहित कई लोग घायल हो गए। अब सवाल यह उठता है कि क्या इस प्रकार की आस्था उचित है? आज अधिकांश लोगों की आस्था लाभ पर आधारित है। दूसरा स्वयंसिद्ध तथ्य यह है कि भीड़ का अपना कोई विवेक नहीं होता इसलिए भीड़ को बहकाना बहुत ही आसान होता है। जो लोग यह दावा कर रहे हैं कि इस पेड़ को छूने मात्र से असाध्य से असाध्य रोग ठीक हो रहे हैं क्या उन्होंने किसी ऐसे रोगी का चिकित्सकीय परीक्षण कर प्रमाण (मेडिकल रिपोर्ट) प्रस्तुत किए जिसका कोई असाध्य रोग इस पेड़ को छूने मात्र से ठीक हुआ हो? यदि अफवाहों को दरकिनार करें तो अब तक एक भी ऐसा मामला प्रकाश में नहीं आया है जो तर्कसंगत इस बात का प्रमाण प्रस्तुत कर सके कि इस पेड़ को छूने मात्र से असाध्य रोग ठीक होते हैं। किन्तु आज के दौर में लोग सदैव लाभ व उम्मीद को अपनी आस्था का आधार बनाते हैं भले ही वास्तविकता चाहे जो हो। अब ज़रा विचार कीजिए कि जिस पेड़ को इस आशा से छूने जा रहे लोग कि वह उनके असाध्य रोग ठीक करेगा यदि वहां जाकर घायल हो जाएं; जैसा कि ग्रामीणों व पुलिस की झड़प के बाद हुआ, तो क्या वह चमत्कारिक हो सकता है? कई बार व्यक्ति की इच्छाशक्ति जिसे अंग्रेजी में "विलपावर" कहा जाता है वह भी इन सब बातों के पीछे अत्यन्त महत्त्वपूर्ण भूमिका अदा करता है। हो सकता कुछ व्यक्तियों को इस पेड़ को छूने से न्यूनाधिक लाभ हुआ हो तो उसकी वजह इस पेड़ की चमत्कारिक शक्ति का नहीं अपितु उनके स्वयं की इच्छाशक्ति (विलपावर) है। आज के सोशल मीडिया के युग में अफ़वाहों को प्रचारित-प्रसारित करना बहुत आसान है। इसके पीछे कुछ अराजक तत्वों के निजी लाभ भी होते हैं। कल तक जिस गांव के बारे में जिले के लोगों को भी पता नहीं था वह आज दूर-दराज के लोगों के पर्यटन का केन्द्र बनता जा रहा है। इससे वहां के ग्रामीणों की व्यापारिक गतिविधियों को भी निश्चित लाभ हुआ है। यह एक बड़ा दुष्चक्र व सुनियोजित व्यापारिक विज्ञापन भी हो सकता है। आज के दौर में हमें कमज़ोर आस्था की नहीं अपितु दृढ़ आस्था व श्रद्धा की आवश्यकता है जो केवल ईश्वर के प्रति होनी चाहिए, शेष सब अपने से हो जाता है। मेरी "वेबदुनिया" के माध्यम से आप समस्त पाठकों से अपील है कि इस प्रकार की अफवाहों पर कतई विश्वास ना करें एवं इन्हें आगे प्रचारित व प्रसारित होने से रोकें।

-ज्योतिर्विद् पं. हेमन्त रिछारिया
प्रारब्ध ज्योतिष परामर्श केन्द्र
सम्पर्क: astropoint_hbd@yahoo.com