घनघोर अंधेरा छाये जब
कोई राह नज़र ना आये जब
कोई तुमको फिर बहकाये जब
इस बात पे थोड़ी देर तलक
तुम आँखें अपनी बंद करना
और अन्तर्मन की सुन लेना
मुमकिन है हम-तुम झूठ कहें
पर अन्तर्मन सच बोलेगा...
जब लम्हा-लम्हा 'आरी' हो
और ग़म खुशियों पे भारी हो
दिल मुश्किल में जब पड़ जाये
कोई तीर सोच का गड़ जाये
तुम आँखें अपनी बंद करना
और अन्तर्मन की सुन लेना
मुमकिन है हम-तुम झूठ कहें
पर अन्तर्मन सच बोलेगा..
जब सच-झूठ में फर्क ना हो
जब गलत-सही में घिर जाओ
तुम नज़र में अपनी गिर जाओ
इस बात पे थोड़ी देर तलक
तुम आँखें अपनी बंद करना
और अन्तर्मन की सुन लेना
मुमकिन है हम-तुम झूठ कहें
पर अन्तर्मन सच बोलेगा...
ये जीवन एक छाया है
दुख, दर्द, मुसीबत माया है
दुनिया की भीड़ में खोने लगो
तुम खुद से दूर होने लगो
तुम आँखें अपनी बंद करना
और अन्तर्मन की सुन लेना
मुमकिन है हम तुम झूठ कहें
पर अन्तर्मन सच बोलेगा ...।

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