रविवार, 19 अगस्त 2018

राष्ट्रपति अंगरक्षक: एक नज़र में


देश-भारत
गठन- वर्ष 1773 में (आजादी से पूर्व)
शाखा-भारतीय सेना (वर्तमान में)
विभाग- BTR-80
स्वरूप-घरेलू घुड़सवार दस्ता
कुल सदस्य-222 (अधिकारी-04, -20, सैनिक-198)
घोष- "भारतमाता की जय"
परेड गीत- "सारे जहां से अच्छा हिन्दुस्तां हमारा..."
रेजीमेन्ट के कर्नल- कर्नल धीरज चेंगप्पा (वर्तमान में)
पदेन प्रमुख- भारत के राष्ट्रपति

(साभार: विश्व ज्ञानकोश)

शुक्रवार, 17 अगस्त 2018

अटलजी को दो कविताएं


मौत से ठन गई...


ठन गई!
मौत से ठन गई!

जूझने का मेरा इरादा न था,
मोड़ पर मिलेंगे इसका वादा न था,

रास्ता रोक कर वह खड़ी हो गई,
यों लगा ज़िन्दगी से बड़ी हो गई।

मौत की उमर क्या है? दो पल भी नहीं,
ज़िन्दगी सिलसिला, आज कल की नहीं।

मैं जी भर जिया, मैं मन से मरूँ,
लौटकर आऊँगा, कूच से क्यों डरूँ?

तू दबे पाँव, चोरी-छिपे से न आ,
सामने वार कर फिर मुझे आज़मा।

मौत से बेख़बर, ज़िन्दगी का सफ़र,
शाम हर सुरमई, रात बंसी का स्वर।

बात ऐसी नहीं कि कोई ग़म ही नहीं,
दर्द अपने-पराए कुछ कम भी नहीं।

प्यार इतना परायों से मुझको मिला,
न अपनों से बाक़ी हैं कोई गिला।

हर चुनौती से दो हाथ मैंने किये,
आंधियों में जलाए हैं बुझते दिए।

आज झकझोरता तेज़ तूफ़ान है,
नाव भँवरों की बाँहों में मेहमान है।

पार पाने का क़ायम मगर हौसला,
देख तेवर तूफ़ाँ का, तेवरी तन गई।

मौत से ठन गई...


मैंने जन्म नहीं मांगा था...


मैंने जन्म नहीं मांगा था,
किन्तु मरण की मांग करूंगा।

जाने कितनी बार जिया हूं,
जाने कितनी बार मरा हूं।
जन्म-मरण के फ़ेरे से मैं,
इतना पहले नहीं डरा हूं।

अन्तहीन अंधियार ज्योति की,
कब तक और तलाश करूंगा।
मैंने जन्म नहीं मांगा था,
किन्तु मरण की मांग करूंगा।

बचपन, यौवन और बुढ़ापा
कुछ दशकों में खत्म कहानी।
फिर-फिर जीना; फिर-फिर मरना,
यह मजबूरी या मनमानी?

पूर्व जन्म के पूर्व बसी,
दुनिया का द्वाराचार करूंगा।
मैंने जन्म नहीं मांगा था,
किन्तु मरण की मांग करूंगा।

-"भारत रत्न" श्री अटलबिहारी वाजपेयी

अटलजी का निर्वाण




AIIMS द्वारा दिनांक 16 अगस्त 2018 को सायं 5:05 PM मिनिट पर पूर्व प्रधानमन्त्री श्री अटल बिहारी वाजपेयी के निधन की घोषणा-


प्रधानमन्त्री नरेन्द्र मोदी द्वारा श्रद्धांजली
पूर्व राष्ट्रपति डा. प्रणब मुखर्जी द्वारा श्रद्धांजली
यूपीए अध्यक्ष श्रीमती सोनिया गांधी द्वारा श्रद्धांजली

पंचतत्व में विलीन होते अटलजी

"पत्रिका"
"दैनिक भास्कर"
                                                       

गुरुवार, 16 अगस्त 2018

अलविदा अटलजी

 
"सरल-चेतना" परिवार की ओर से पूर्व प्रधानमन्त्री व जनप्रिय नेता, भारत के महान सपूत "भारत-रत्न"
श्री अटल बिहारी वाजपेयी जी को भावपूर्ण श्रद्धांजली-


 एक महामानव की विदाई

मंगलवार, 14 अगस्त 2018

भारतवर्ष की कुण्डली का सच


आज 15 अगस्त अर्थात् स्वतन्त्रता दिवस आने को है। इस दिन सभी देशवासी आजादी का जश्न मनाते हैं। आज के दिन देश से जुड़ी हर तरह की चर्चाएं अपने चरम पर होती हैं। इसके साथ ही एक विशेष चर्चा जो इस दिन होती है; वह है भारतवर्ष की कुण्डली का फ़लित। तमाम न्यूज़ चैनलों पर ज्योतिष के दिग्गज भारतवर्ष की जन्मपत्रिका आंकलन कर आने वाले साल में देश के ज्योतिषीय लाभ-हानि पर अपना मत प्रकट करते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि भारत की जन्मपत्रिका एक भ्रामक प्रचार मात्र है! चौंकिए मत, मेरे ऐसा कहने के पीछे कुछ विशेष कारण है। आज हम ऐसे ही कुछ कारणों व तथ्यों की जानकारी अपने पाठकों को देने जा रहे हैं जिसके आधार पर वे यह स्वयं तय कर सकें कि भारत की कुण्डली कितनी सच है।

1.जड़ वस्तु का ज्योतिषीय विश्लेषण नहीं-
मेरे देखे किसी भी जड़ वस्तु का ज्योतिषीय विश्लेषण नहीं हो सकता फ़िर चाहे वह देश हो, खेत-खलिहान हो या मकान इत्यादि। उनके ज्योतिषीय विश्लेषण के लिए वह जिस व्यक्ति के आधिपत्य में है उसकी जन्मपत्री का विश्लेषण किया जाना चाहिए ना कि उस वस्तु का। जैसे यदि किसी राज्य का विश्लेषण करना हो तो वह उसके राजा की जन्मपत्री के आधार पर किया जाएगा।

2. भारत की प्रचलित कुण्डली ही गलत है-
यदि हम यह मान भी लें कि भारतवर्ष की कुण्डली के आधार पर भारत के भविष्य के सम्बन्ध में कुछ भविष्यवाणियां की जा सकती हैं तो उसके लिए भारत की प्रामाणिक जन्मपत्रिका का होना आवश्यक है। अभी तक तथाकथित ज्योतिषीगण जिस जन्मपत्री को भारत की जन्मपत्रिका बताकर उसका विश्लेषण करते हैं वह जन्मपत्रिका सर्वथा असत्य व गलत है। ऐसा मैं इसलिए कह रहा हूं कि जन्मपत्रिका के निर्माण के लिए जातक के जन्म की सही दिनांक, समय व स्थान की आवश्यकता होती है। भारत के सम्बन्ध में यह तीनों ही अप्राप्त हैं अब आप शायद मेरी बातों का विश्वास ना करें क्योंकि आप कहेंगे भारत का जन्म तो 15 अगस्त सन 1947 को रात्रि 12:00 बजे हुआ था। भारतवर्ष की बताई जाने वाली जन्मपत्रिका भी इसी समय व दिनांक के आधार पर बनी हुई होती है लेकिन यह पूर्णत: गलत है क्योंकि जन्म तो "पाकिस्तान" का हुआ था ना कि भारत का, भारत का तो विभाजन हुआ था। विभाजन के आधार पर यदि भारत का जन्म माने तो भारत का विभाजन तो इससे पूर्व भी कई बार हो चुका था। अत: भारत के जन्म अर्थात निर्माण के सम्बन्ध में कोई दिनांक व समय प्राप्त ही नहीं है तो फ़िर जन्मपत्रिका का निर्माण कैसे हो?

3. समान कुण्डली-
14 एवं 15 अगस्त को रात्रि 12:00 बजे को आधार मानकर निर्माण की जाने वाली कुण्डलियों में चन्द्र को छोड़कर सभी ग्रहों व लग्नादि की समानता है क्योंकि ग्रह परिवर्तन सामान्यत: कम से कम 1 माह में ही होता है। अत: जब कुण्डली एक ही समान हैं तो फ़लित विलग-विलग कैसे संभव है? इसका निर्णय आप स्वयं कीजिए।
4. विभाजन के आधार पर समय अलग नहीं हो सकता-
हम यदि भारत के विभाजन को भी जन्मपत्रिका निर्माण का आधार मानें जो कि सर्वथा गलत है तो भी विभाजन का समय अलग-अलग नहीं हो सकता। जिस दिन पाकिस्तान का निर्माण किया गया ठीक उसी समय वर्तमान भारत भी अस्तित्व में आ गया फ़िर दोनों देशों का निर्माण समय अलग-अलग कैसे हुआ? स्वतंत्रता या परतंत्रता ज्योतिष का आधार नहीं हो सकती।

अत: उपर्युक्त तथ्यों के आधार पर यह स्पष्ट हो जाता है कि भारतवर्ष की कुण्डली बनाकर उसका फ़लित व भविष्य विश्लेषण सम्बन्धी बातें करना नितांत असत्य व भ्रामक हैं।

-ज्योतिर्विद पं. हेमन्त रिछारिया
प्रारब्ध ज्योतिष परामर्श केन्द्र
सम्पर्क: astropoint_hbd@yahoo.com




अन्तर्मन


घनघोर अंधेरा छाये जब
कोई राह नज़र ना आये जब
कोई तुमको फिर बहकाये जब
इस बात पे थोड़ी देर तलक
तुम आँखें अपनी बंद करना
और अन्तर्मन की सुन लेना
मुमकिन है हम-तुम झूठ कहें
पर अन्तर्मन सच बोलेगा...

जब लम्हा-लम्हा 'आरी' हो
और ग़म खुशियों पे भारी हो
दिल मुश्किल में जब पड़ जाये
कोई तीर सोच का गड़ जाये
तुम आँखें अपनी बंद करना
और अन्तर्मन की सुन लेना
मुमकिन है हम-तुम झूठ कहें
पर अन्तर्मन सच बोलेगा..

जब सच-झूठ में फर्क ना हो
जब गलत-सही में घिर जाओ
तुम नज़र में अपनी गिर जाओ
इस बात पे थोड़ी देर तलक
तुम आँखें अपनी बंद करना
और अन्तर्मन की सुन लेना
मुमकिन है हम-तुम झूठ कहें
पर अन्तर्मन सच बोलेगा...

ये जीवन एक छाया है
दुख, दर्द, मुसीबत माया है
दुनिया की भीड़ में खोने लगो
तुम खुद से दूर होने लगो
तुम आँखें अपनी बंद करना
और अन्तर्मन की सुन लेना
मुमकिन है हम तुम झूठ कहें
पर अन्तर्मन सच बोलेगा ...।

-साभार (वाट्स अप)

रविवार, 12 अगस्त 2018

क्या 15 अगस्त ही है स्वतन्त्रता दिवस..!


 क्या आप जानते हैं भारत को स्वतंत्रता कब प्राप्त हुई? आप कहेंगे- "हां", 15 अगस्त 1947 को। यदि मैं कहूं कि आपका जवाब गलत है, तो आप चौंक जाएंगे। लेकिन इतिहास बताता है भारत की आजादी का शंखनाद 30 दिसम्बर सन 1943 को अंडमान-निकोबार से हो गया था। 30 दिसम्बर सन 1943 के ही दिन नेताजी सुभाष चन्द्र बोस ने अंडमान-निकोबार द्वीप समूह के पोर्ट ब्लेयर के जिमखाना मैदान में सर्वप्रथम आजादी की घोषणा करते हुए तिरंगा फ़हराया था। यह भारत की आज़ादी का शंखनाद था। विडम्बना है कि कांग्रेसी शासन ने विद्वेषता के चलते इस अति-महत्त्वपूर्ण तथ्य को नज़र अंदाज़ किया।
"21 अक्टूबर 1943 को सुभाष बोस ने आजाद हिन्द फौज के सर्वोच्च सेनापति की हैसियत से स्वतन्त्र भारत की अस्थायी सरकार बनायी जिसे जर्मनी, जापान, फिलीपींस, कोरिया, चीन, इटली, मान्चुको और आयरलैंड ने मान्यता दी। जापान ने अंडमान व निकोबार द्वीप इस अस्थायी सरकार को दे दिये। सुभाष उन द्वीपों में गये और उनका नया नामकरण किया। 1944 को आजाद हिन्द फौज ने अंग्रेजों पर दोबारा आक्रमण किया और कुछ भारतीय प्रदेशों को अंग्रेजों से मुक्त भी करा लिया।"
-(साभार: विश्व ज्ञानकोश)

प्रस्तुति: पं. हेमन्त रिछारिया