शुक्रवार, 17 नवंबर 2017

पिता की पाती


मेरा गर्व मेरा अभिमान हो तुम,
मेरे घर की शान मेरी मुस्कान हो तुम,
मेरा मान हो; सम्मान हो तुम,
तुम हो प्राणवायु मेरी,
मेरे सारे अरमान हो तुम।
तुम मरी पहचान हो,
मेरे लिए वरदान हो तुम,
भगवान का अहसान है
मेरे घर विराजमान हो तुम,
तुम सदा हँसती रहो
सदा सुखी रहो,
मेरा सारा जहान हो तुम।
मेरी आयु तुम्हें मिल जाए
मेरे लिए भगवान हो तुम,
मेरा गर्व मेरा अभिमान हो तुम॥

- तेजमोहन पटेल, होशंगाबाद (म.प्र.)
(सहा. पशु चिकित्सा क्षेत्र अधिकारी)

शुक्रवार, 10 नवंबर 2017

नेताजी का कमरा


कोलकाता के एल्गिंन रोड स्थित नेताजी सुभाषचन्द्र बोस के घर का वह कमरा जिससे उन्होंने 16-17 जनवरी 1941 की मध्यरात्रि "महानिष्क्रमण" किया था।

गुरुवार, 9 नवंबर 2017

चाहत


तुम मुझसे बात न करो
और मैं तुमसे मिल न पाऊँ
इसकी रत्ती भर शिकायत नहीं मुझे
लेकिन, कम से कम इतना तो चाहती हूँ
कि तुम्हारी गँध इन हवाओं में बरकरार रहे,
तुम्हारा स्पर्श यूँ ही छूता रहे,
फ़ूलों, दरख़्तों, छायाओं, लहरों पर।
तुम्हारी मन्द मुस्कान और आँखों की नमी,
चाँद-तारों सी टँकी रहे आसमान पर,
तुम्हारी थिरकती उँगलियों से
उठती हुई ताल बजती रहे,
मेरे आस-पास।
तुम्हारा गीत गूँजता रहे दिशाओं में,
बस...इतना ही तो चाहती हूँ मैं।

-रोज़लीन, करनाल (हरियाणा)

सोमवार, 16 अक्टूबर 2017

अँधेरा धरा पर कहीं रह न जाए...


जलाओ दीये पर ध्यान रहे इतना
अँधेरा धरा पर कहीं रह न जाए।

नई ज्योति के धर नए पँख झिलमिल,
उड़े मिट्टी गगन स्वर्ग छू ले,
लगे रोशनी की झड़ी झूम ऐसी,
निशा की गली में तिमिर राह भूले,
खुले मुक्ति का वह किरण द्वार जगमग,
ऊषा जा न पाए; निशा आ न पाए,
जलाओ दीये.......

सृजन है अधूरा अगर विश्व भर में,
कहीं भी किसी द्वार पर है उदासी,
मनुजता नहीं तब तक पूर्ण बनेगी,
कि जब तक लहू के लिये भूमि प्यासी,
चलेगा नाश का खेल यूँ ही,
भले ही दिवाली यहाँ रोज़ आए,
जलाओ दीये.....

मगर दीप की दीप्ति से जग में,
नहीं मिट सका है धरा का अँधेरा,
उतर क्यों न आएँ नखत सब नयन के,
नहीं कर सकेंगे ह्रदय में उजेरा,
कटेंगे तभी यह अँधेरे घिरे अब,
स्वयँ धर मनुज दीप का रूप आए,
जलाओ दीये पर रहे ध्यान इतना,
अँधेरा धरा पर कहीं रह न जाए।

- गोपालदास "नीरज"

तुमको दीप जलाना होगा

चहुँओर अँधियारा है
दिनकर भी थक हारा है
लेकिन मेरी देहरी पर
उजियारे को लाना होगा
तुम्हें दीप जलाना होगा...

तन्हाई का डेरा है
दु:ख ने किया बसेरा है
इस भीषण दावानल में
अपना हाथ बढ़ाना होगा
तुम्हें दीप जलाना होगा...

बहुत दूर किनारा है
प्रतिकूल नदी की धारा है
भँवर में फँसी नैया की
अब पतवार चलाना होगा
तुम्हें दीप जलाना होगा....

-ज्योतिर्विद पं. हेमन्त रिछारिया




हमारा सौरमण्डल


चन्द्रमा -
1. चन्द्रमा पृथ्वी का एक उपग्रह है। चन्द्रमा हमारे सौरमण्डल का पाँचवा सबसे बड़ा उपग्रह है।
2. चन्द्रमा की अपनी कोई रोशनी नहीं है बल्कि यह सूर्य से पड़ने वाली रोशनी के कारण चमकता है।
3. चन्द्रमा पृथ्वी से 4 गुना छोटा है।
4. चन्द्रमा का गुरूत्वाकर्षण पृथ्वी की तुलना में काफ़ी कम है।
5. खगोलशास्त्रियों के अनुसार चन्द्रमा पृथ्वी का ही एक हिस्सा है जो करोड़ों वर्षों पर पूर्व एक
    उल्का पिण्ड के पृथ्वी  से टकराने के कारण टूट कर अलग हो गया था।
6. पृथ्वी पर जिस वस्तु का वज़न 10 किग्रा है चन्द्रमा पर उसका वज़न मात्र 1.5 किग्रा होगा।
7. पृथ्वी से चन्द्रमा का केवल एक हिस्सा ही दिखाई देता है। दूसरा हिस्सा पृथ्वी से कभी नहीं दिखेगा।
8. पृथ्वी से चन्द्रमा का केवल 59 फ़ीसदी हिस्सा ही दिखाई देता है। चन्द्रमा का 41 फ़ीसदी हिस्सा केवल अंतरिक्ष में जाकर ही देखा जा सकता है।
9. चन्द्रमा पृथ्वी का एक चक्कर लगाने में 27 दिन 7 घण्टे का समय लगाता है एवं ठीक इतने ही समय में वह अपनी धुरी पर एक बार घूम जाता है।

मंगल ग्रह-
1. यह आकार में पृथ्वी से 10 गुना छोटा है।
2. सूर्य से इसकी दूरी 22 करोड़ 79 लाख किमी है।
3. मंगल ग्रह पर एक साल 687 दिन का होता है।
4. यह ठोस ग्रह है।
5. इसके दो चन्द्रमा हैं।
6. मंगल ग्रह का सबसे बड़ा पर्वत ओलम्पस माउण्ट हमारे एवरेस्ट पर्वत से 3 गुना बड़ा है।
7. यदि आपका वज़न 100 किलो है तो मंगल पर आपका वज़न सिर्फ़ 37 किलो होगा क्योंकि मंगल पर गुरुत्वाकर्षण बल बेहद कम है।

बुध ग्रह-
1. इसकी सूर्य से दूरी 5.5 करोड़ किमी है।
2. यह सूर्य की परिक्रमा 1.5 दिन में पूरी कर लेता है।
3. यह सौरमण्डल का सबसे छोटा ग्रह है।

गुरू ग्रह-
1. हमारी पृथ्वी से 1300 गुना बड़ा है।
2. सूर्य से इसकी दूरी 78 करोड़ किलोमीटर है।
3. यह अपनी धुरी पर घूमने वाला सबसे तेज ग्रह है। यह 9 घण्टे 55 मिनिट में अपनी धुरी का 1 चक्कर लगा लेता है।
4. यह गैसीय ग्रह है।
5. इस ग्रह का एक चन्द्रमा है।

शुक्र ग्रह-
1. यह आकार में पृथ्वी से आँशिक छोटा है।
2. सूर्य से इसकी दूरी 11 करोड़ किलोमीटर है।
3. यह सौरमण्डल के नर्क के समान है क्योंकि यहाँ  सल्फ़्यूरिक एसिड के बादल हैं जिनसे तेजाब की बारिश होती रहती है।
4. यह सबसे गर्म ग्रह है। इसका अधिकतम तापमान 400 डिग्री सेल्सियस तक पहुँच जाता है।
5. इस ग्रह का कोई चन्द्रमा नहीं है।
6. यह सौरमण्डल का एकमात्र ऐसा ग्रह है जहाँ सूर्य पश्चिम से निकलकर पूर्व में अस्त होता है।
7. शुक्र ग्रह का एक साल 224 दिनों का होता है।
8. जब यह पृथ्वी के सर्वाधिक निकट होता है तब पृथ्वी से इसकी दूरी 26करोड़ किमी होती है और जब यह पृथ्वी से सर्वाधिक दूर होता है तब पृथ्वी से इसकी दूरी 160 करोड़ किमी होती है।

शनि ग्रह-
1. हमारी पृथ्वी से 700 गुना बड़ा है।
2. सूर्य से इसकी 142 करोड़ किलोमीटर है।
3. शनि ग्रह पर 1800 किमी. प्रतिघण्टे की रफ़्तार से हवाएँ चलती हैं।
4. शनि ग्रह के 62 उपग्रह हैं।

-ज्योतिर्विद् पं. हेमन्त रिछारिया
प्रारब्ध ज्योतिष परामर्श केन्द्र

शुक्रवार, 6 अक्टूबर 2017

अन्धभक्ति नहीं होनी चाहिए


इन दिनों सोशल मीडिया पर एक वीडियो और तस्वीर वायरल हो रही है जिसमें विजयादशमी की पूजा वाले दिन हमारे प्रधानसेवक मोदी जी को टिश्यू पेपर को अपने जेब में रखते हुए दिखाया जा रहा है। मोदी भक्त इसे उनकी महानता का प्रतीक बताकर सोशल मीडिया पर खूब साझा कर रहे हैं। सही भी है करना भी चाहिए; महानता भी है जो स्वच्छता का इतना ख्याल रखा गया लेकिन इसी कार्यक्रम इन्हीं प्रधानसेवक ने जूते पहनकर जब राम-लक्ष्मण व हनुमान बने पात्रों की पूजा व आरती की उसे क्या कहिएगा? केवल प्रधानसेवक मोदी ने ही नहीं अपितु राष्ट्रपति, उप-राष्ट्रपति, पूर्व प्रधानमन्त्री डा. मनमोहन सहित सभी अतिथियों ने जूते पहनकर ही राम-लक्ष्मण व हनुमान बने पात्रों की पूजा अर्चना की थी। मेरा इस बात को इस मंच पर रखने का आशय बस इतना ही है भक्ति अपनी जगह ठीक है लेकिन अन्धभक्ति नहीं होनी चाहिए, जो इन दिनों कुछ लोग प्रधानसेवक की करने में लगे हुए हैं।

-ज्योतिर्विद पं. हेमन्त रिछारिया