हाल ही सम्पन्न हुए पांच राज्यों के चुनावों में कांग्रेस आशातीत सफ़लता प्राप्त
कर तीन प्रमुख राज्यों में अपनी सरकार बनाने में कामयाब हुई है। मध्यप्रदेश व छत्तीसगढ़
में तो कांग्रेस ने 15 साल बाद सत्ता में वापसी की है। अब इन तीनों
प्रदेशों के निवासियों को इस बात को लेकर उत्सुकता है कि आखिर नई सरकार का कार्यकाल
कैसा रहेगा! क्या होगी नई सरकार के लिए चुनौतियां? हमने
"वेबदुनिया" के पाठकों के लिए तीन राज्यों में गठित हुई नवीन सरकारों के
शपथग्रहण के समय को आधार बनाकर इस प्रश्न का समाधान देने का प्रयास किया है-
1. मध्यप्रदेश-
मध्यप्रदेश सरकार के मुखिया श्री कमलनाथ ने मेष लग्न में शपथग्रहण किया है। मेष
एक चर लग्न है। शपथग्रहण के समय मेष राशि का स्वामी मंगल लाभ भाव में स्थित था। चतुर्थ
भाव में राहु स्थित है। वहीं सत्ता व कर्मक्षेत्र के अधिपति शनि नवम भाव में अपने नैसर्गिक
शत्रु सूर्य के साथ स्थित हैं। धनेश शुक्र स्वराशिस्थ होकर सप्तम भाव में स्थित हैं।
इन ग्रहस्थितियों के आधार पर यह संकेत मिल रहा है कि आने वाले वर्षों में सरकार को
गंभीर चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा। मार्च 2020 के
बाद सरकार को जन-आक्रोश का सामना करना पड़ेगा। इस अवधि में सरकार की लोकप्रियता में
तेजी से कमी आएगी। इस अवधि में सरकार को अस्थिर करने के प्रयास होंगे। जिनसे निपटना
सरकार के लिए एक गंभीर चुनौती होगा। मार्च 2020 से मार्च 2021 के मध्य सरकार को भारी अन्तर्कलह से जूझना होगा। अक्टूबर 2020 के बाद सरकार के विरूद्ध अविश्वास प्रस्ताव लाए जाने की भी संभावना है। चूंकि
मेष एक चर लग्न है इसलिए सरकार के लिए अपनी स्थिरता बनाए रखना सबसे बड़ी चुनौती होगी।
धनेश का स्वराशिस्थ होना सरकार को आर्थिक मोर्चे पर कुछ सफ़लता का संकेत दे रहा है।
किन्तु लाभेश व आयेश का अपने नैसर्गिक शत्रु के साथ युतिकारक होना सरकार को नए वित्तीय
संसाधन में जुटाने में बड़ा अवरोध खड़ा करेगा। वर्ष 2021 से सरकार
की लोकप्रियता में निरन्तर कमी आएगी एवं उसे जन-आक्रोश का सामना करना पड़ेगा। लग्नेश के लाभ भाव में स्थित होने के कारण सरकार हर प्रतिकूल परिस्थिति से निपटने
में सफ़ल होगी। सरकार के लिए मार्च 2020 से मार्च 2021 की अवधि बेहद चुनौतीपूर्ण रहेगी यदि इस अवधि की चुनौतियों पर सफ़लतापूर्वक
विजय प्राप्त कर ली जाती है तो सरकार अपना कार्यकाल पूरा करने में सफ़ल होगी।
2. छत्तीसगढ़-
छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल ने मिथुन लग्न में शपथ ली है। मिथुन एक
द्विस्वभाव लग्न है। शपथग्रहण के समय मिथुन राशि का स्वामी बुध छठे भाव स्थित था। मिथुन
लग्न में बुध चतुर्थेश अर्थात् जनता के कारक भी होते हैं। बुध पर राहु का दृष्टि प्रभाव
भी है। कर्मक्षेत्र व सत्ता का तात्कालिक कारक गुरु भी छठे भाव में स्थित है एवं गुरू
पर भी राहु का दृष्टि प्रभाव है। इन ग्रहस्थितियों के आधार पर यह संकेत मिल रहा है
कि छत्तीसगढ़ सरकार के लिए अपना कार्यकाल पूरा करना बेहद चुनौतीपूर्ण होगा। वर्ष 2020 में सरकार को गंभीर अन्तर्विरोध का सामना करना पड़ेगा। इस अवधि में सरकार के
मुखिया व नेतृत्व के प्रति अन्तर्कलह सामने आएगी। सत्तारुढ़ के दल के अन्दर ही नेतृत्व
परिवर्तन की मांग ज़ोर पकड़ेगी। मिथुन लग्न के स्वभाव एवं विंशोत्तरी दशाओं के आलोक में
वर्ष 2020-2023 के मध्य राज्य की सरकार
में नेतृत्व परिवर्तन हो सकता है। धन भाव में राहु का स्थित होना सरकार के लिए वित्तीय
क्षेत्र में कठिनाईयों का संकेत कर रहा है। सरकार को आर्थिक मोर्चे पर गंभीर चुनौतियों
का सामना करना पड़ेगा। वर्ष 2020 में सरकार की लोकप्रियता में
कमी आएगी। इस अवधि में सरकार के प्रति विपक्ष आक्रामक रहेगा। सरकार को जन-आक्रोश का
सामना करना पड़ेगा। लग्नेश की स्थिति व कर्मक्षेत्र पर क्रूर ग्रहों के प्रभाव के कारण
सरकार को अन्तर्विरोध के चलते अपना स्थायित्व बनाए रखना एक बड़ी चुनौती होगी। यदि सरकार
इन चुनौतियों से सफ़लतापूर्वक निपट लेती है तो सरकार अपना कार्यकाल पूरा करने में सफ़ल
रहेगी।
3. राजस्थान-
राजस्थान के
मुख्यमंत्री श्री अशोक गेहलोत
ने कुम्भ लग्न में
शपथग्रहण की थी। कुम्भ
एक स्थिर लग्न है।
कुम्भ लग्न का स्वामी
शनि सत्ता का नैसर्गिक
कारक होता है। शपथग्रहण
के समय लग्नेश शनि
लाभ भाव में स्थित
थे। यह एक बहुत
अनुकूल स्थिति है। इससे
यह स्पष्ट संकेत मिल
रहा कि राजस्थान सरकार
अपना कार्यकाल बड़ी
सफ़लता व सहजता के
साथ पूर्ण करेगी। सत्ता
व कर्मक्षेत्र के अधिपति
का लग्नस्थ होना सरकार
को स्थायित्व प्रदान
करेगा। धनेश व लाभेश
का केन्द्रस्थ होना
सरकार को आर्थिक मोर्चे
पर सफ़लता प्रदान करेगा।
सरकार अपने विकास कार्यों
को गति प्रदान करने
में कामयाब होगी। जनता
के तात्कालिक कारक
चर्तुर्थेश शुक्र का स्वराशिस्थ
होकर त्रिकोण भाव में
स्थित होना सरकार के
लोकप्रिय होने का संकेत
दे रहा है। सरकार
को जनता का प्रेम
व सहयोग प्राप्त होगा।
राहु का छठे भाव
में स्थित होने के
कारण सरकार अपने विरोधियों
से कुशलतापूर्वक निपटने
में सक्षम होगी एवं
सरकार पर विपक्ष हावी
नहीं हो पाएगा। अन्तिम
निष्कर्ष के रूप में
यह कहा जा सकता
है कि राजस्थान सरकार
शेष दो सरकारों की
तुलना में अधिक सहजता
व सफ़लता के साथ
अपना कार्यकाल पूर्ण
करेगी।
-ज्योतिर्विद् पं. हेमन्त रिछारिया
प्रारब्ध ज्योतिष
परामर्श केन्द्र
सम्पर्क:
astropoint_hbd@yahoo.com

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