शुक्रवार, 6 जुलाई 2018

...और जोड़ा बिछड़ गया

अमृतलाल जी बेगड़ अपनी धर्मपत्नी कान्ताजी के साथ
नर्मदा पुत्र श्री अमृतलाल जी बेगड़ नहीं रहे। कल सायं जब यह खबर मिली तो मानस पटल पर अमृतलाल जी से हुई भेंट स्मरण आ गई। मेरी उनसे पहली और आखिरी मुलाकात नदी महोत्सव के दौरान हुई थी। लगभग आधे घण्टे की इस मुलाकात में उनका विनम्र स्वभाव, सरल व सादा व्यक्तित्व एवं नर्मदा के प्रति उनका समर्पण मन को मोहित कर गया। उन्होंने नर्मदा संरक्षण एवं नदी संरक्षण के क्षेत्र में बहुत कार्य किया है। मां नर्मदा पर उनकी कृति "सौंदर्य की नदी नर्मदा" अद्भुत है। अमृतलाल जी का मानना था कि नर्मदा जैसी सुन्दर नदी विश्व में दूसरी नहीं है। वे अक्सर अपनी धर्मपत्नी कान्ताजी के साथ ही दिखाई देते थे। कान्ता जी ने उनके इस महाभियान सच्चे जीवनसाथी के सदृश उनका हर कदम पर साथ निभाया। वे भी अत्यन्त सौम्य व सरल महिला हैं। नदी महोत्सव उन दोनों को देखकर अक्सर हंसों का जोड़ा याद आ जाता है किन्तु कल उस जोड़े का एक हंस उड़ गया अनन्त आकाश में या यूँ कहें कि नर्मदा के अविरल प्रवाह की भाँति उनके इस अनन्य साधक ने भी इस नश्वर जीवन का एक किनारा छोड़ दूसरे किनारे के लिए महाप्रयाण कर दिया।
उनके चरणों में हमारी भावभीनी श्रद्धांजलि....!! ॐ शान्ति !!

-ज्योतिर्विद् पं. हेमन्त रिछारिया
संपादक- "सरल चेतना"


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