(1.) "ज़रा आँखें तो तरेरिए ममत्व के लिए,
सिंह की दहाड़ सिर्फ़ हिन्दुत्व के लिए?"
(2.) "मेरी तकरीर ना कौम की हिफ़ाज़त के लिए है,
ये सियासी बातें तो फ़कत सियासत के लिए हैं"
(3.) "मुफ़लिसों के लहू की जाने कैसी ये प्यास है,
मौत के सौदागरों को जन्नत की तलाश है।"
(4.) "मैं परेशां हूं हमने आधा कश्मीर हारा क्यों
लोग परेशां है कटप्पा ने बाहुबली मारा क्यों"
(5) "ये कोई सियासी भूल सा लगता है
वो संग फ़ेके तो फ़ूल सा लगता है"
(6) "मन्दिर-मस्ज़िद पे सियासत उन्हें चमकानी है
हमें तो साहब अपने चूल्हे की आग जलानी है"
(7) "शाह-औ-मुफ़लिस का फ़र्क कैसे मिटता
ए कज़ा तूने सब बराबर कर दिया"
(8) "दिल पे लगी हर चोट बुरी होती है
मन्न्तों बाद कोई गोद हरी होती है।
-ज्योतिर्विद् पं. हेमन्त रिछारिया
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