यद्यपि शुद्धं;लोक विरूद्धं,
नाकरणीयं; नाचरणीयं।
(किरातार्जुने)
यद्यपि जो शुद्ध हो किंतु लोकरीति के विरूद्ध हो,ऐसा आचरण नहीं करना चाहिए।
*****
हिमालयं समारभ्य यावदिन्दु सरोवरमं।
तं देवनिर्मितं देशं हिंदुस्थानं प्रचक्ष्यते॥
(बृहस्पति आगम)
*****
उपदेशो हि मूर्खाणां प्रकोपाय न शान्तये
पयपानं भुजंगानां केवल विषवर्धनमं।
*****
न मांसभक्षणे दोषो न मद्ये न च मैथुने।
प्रवृत्तिरेषा भूतानां निवृत्तिस्तु महाफला॥
(मनुस्मृति ५-५३)
अर्थ-मांसभक्षण,मद्यपान और मैथुन में दोष नहीं है। मनुष्यों में यह गुण प्रकृति प्रदत्त हैं, किन्तु इनसे निवृत्ति लेना अधिक श्रेष्ठ है।
नाकरणीयं; नाचरणीयं।
(किरातार्जुने)
यद्यपि जो शुद्ध हो किंतु लोकरीति के विरूद्ध हो,ऐसा आचरण नहीं करना चाहिए।
*****
हिमालयं समारभ्य यावदिन्दु सरोवरमं।
तं देवनिर्मितं देशं हिंदुस्थानं प्रचक्ष्यते॥
(बृहस्पति आगम)
*****
उपदेशो हि मूर्खाणां प्रकोपाय न शान्तये
पयपानं भुजंगानां केवल विषवर्धनमं।
*****
न मांसभक्षणे दोषो न मद्ये न च मैथुने।
प्रवृत्तिरेषा भूतानां निवृत्तिस्तु महाफला॥
(मनुस्मृति ५-५३)
अर्थ-मांसभक्षण,मद्यपान और मैथुन में दोष नहीं है। मनुष्यों में यह गुण प्रकृति प्रदत्त हैं, किन्तु इनसे निवृत्ति लेना अधिक श्रेष्ठ है।
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें