![]() |
| अखण्ड भारतवर्ष |
हम कहां आ गए।
होती बड़ी निराशा है,
ना ही कोई दिलासा है।
कैसे बचाएं वतन अपना
सियासी दीमक खा गए॥
बीते ६६ साल यार, हम कहां आ गए।
गहन तिमिर का घेरा है,
घोर निशा का डेरा है।
कैसे फैलेगी अरूणिमा
काले मेघ जो छा गए॥
बीते ६६ साल यार, हम कहां आ गए।
पतनोन्मुख हुई व्यवस्था है,
हालत हो रही खस्ता है।
लक्ष्य विकास के सारे
आंकड़ों ही से पा गए॥
बीते ६६ साल यार, हम कहां आ गए।
-हेमन्त रिछारिया

कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें