उपवन के सुमनों ने सम्मान सदा पाया
किसने जाना कब कौन कहा वनफूल खिला,
किसने जाना कब महका वह कब मुरझाया
कब बिखर धूल में वह अनदेखा फूल मिला।
इस भारत उपवन में जाने कितने वन-फूल खिले
वे अनदेखे-अनजाने ही चुपचाप झड़े,
माताओं के लाड़ले लाल जाने कितने
आज़ादी की मंज़िल के नीचे दबे पड़े।
-सरलजी
किसने जाना कब कौन कहा वनफूल खिला,
किसने जाना कब महका वह कब मुरझाया
कब बिखर धूल में वह अनदेखा फूल मिला।
इस भारत उपवन में जाने कितने वन-फूल खिले
वे अनदेखे-अनजाने ही चुपचाप झड़े,
माताओं के लाड़ले लाल जाने कितने
आज़ादी की मंज़िल के नीचे दबे पड़े।
-सरलजी
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