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| बाल भगत |
पीठ थपथपा पूछ रहे-"बेटे ! तुम क्या करने बैठे?
कुआँ खोद कर क्या तुम उसमें हो पानी भरने बैठे?
"नहीं-नहीं चाचाजी ! मैं तो अच्छा बाग लगाऊँगा।
मैं दम्बूक (बन्दूक) बो रहा, दंबूकों का पेड़ उगाऊँगा।"
"अच्छा तुम बन्दूक बो रहे पर फल किसे चखाओगे?
क्या चिड़ियों के छोटे-छोटे बच्चे मार गिराओगे?"
"दम्बूकों के फल चाचाजी मेरे दुश्मन खाएँगे,
चिड़िया के बच्चे तो मेरे साथ खेलने आएँगे।
"मुन्ने कौन तुम्हारा दुश्मन यह भी तो बतलाओ
चले निशाना किसे बनाने,यह भी मुझको समझाओ।"
"राज कर रहे जो भारत पर, वे सब अपने दुश्मन हैं
उन्हें भगा कर अपनी माँ के हमें काटने बन्धन हैं।"
- श्रीकृष्ण "सरल"
(भगतसिंह के पिता के मित्र श्री आनन्दकिशोर मेहता जो काँग्रेस कमेटी के मन्त्री थे। उन्होंने भगतसिंह को खेत में बन्दूक गड़ाते देखा। प्रश्न करने पर भगतसिंह ने उत्तर दिया "मैं दम्बूक बोदाँ हाँ"। उस समय बाल भगत बन्दूक को ’दम्बूक’ कहता था।)

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