हमारी हर कहानी में तुम्हारा नाम आता है
ये कैसे सबको समझाएं कि तुमसे कैसा नाता है।
ज़रा सी परवरिश भी चाहिए हर एक रिश्ते को
अगर सींचा ना जाए तो पौधा सूख जाता है।
ये मेरे और ग़म के बीच में रिश्ता है बरसों से
मैं उसको आज़माता हूं वो मुझको आज़माता है।
जिसे चींटी से लेकर चांद-सूरज सब सिखाया था
वही बेटा बडा़ होकर सबक मुझको सिखाता है।
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