"न्याय नहीं अन्याय है, मैं कहता हूं साफ
सुख बांटो तो दु:ख मिले, ये कैसा इंसाफ"
"इस दुर्लभ भंडार को, लूट सके तो लूट
जो सच से अच्छे लगें, ऐसे हैं कुछ झूठ"
"खींचातानी हो चुकी, दिशा-दिशा हर ओर
अब मत खींचो सांसों की डोरी है कमज़ोर"
"जैसी बस्ती में रहो, चलन वही अपनाओ
इस बस्ती की रीत है,मारो या मर जाओ"
"जो होना था हो गया,ये किस्मत की बात
इस छोटी सी बात पर,क्या रोना दिन रात"
-डा.अख्तर नज़मी
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