कोई दो कदम साथ चलता नहीं है
बस यही ग़म दिल से निकलता नहीं है
इलाही मेरे दिल को शाबाशी दे दे
यह बच्चों के जैसे मचलता नहीं है
कोई तो सितारा मुकद्दर में होगा
यही सोच कर दम निकलता नहीं है
तमाशा-तमाशा; हुए हम तमाशा
मगर फिर भी ये दिल बहलता नहीं है
-सुनीता रैना
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