सोमवार, 22 अप्रैल 2019

गोधूलि लग्न कब उचित...!

विवाह का दिन एवं विवाह लग्न निश्चित करना एक बेहद चुनौतीपूर्ण व श्रमसाध्य कार्य है जिसे किसी विद्वान दैव से ही करवाना चाहिए।  अक्सर लोग अपनी भौतिक आकांक्षाओं की पूर्ती के चलते विवाह का दिन व लग्न सुनिश्चित करने में गंभीर लापरवाही एवं शुभ-मुहूर्त्त की उपेक्षा करते हैं। जिसका दुष्परिणाम यदा-कदा दम्पत्ति को अपने वैवाहिक जीवन में भोगना पड़ता है। शास्त्रानुसार विवाह लग्न की शुद्धि "मेलापक" (कुण्डली मिलान) के कई दोषों को समाप्त करने का सामर्थ्य रखती है। अत: विवाह का दिन एवं विवाह लग्न का चयन बड़ी ही सावधानी से किया जाना चाहिए।

क्या है "गोधूलि लग्न" ?
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जब भी विवाह-लग्न चयन की बात होती है तो "गोधूलि लग्न" की भी चर्चा होती है। गोधूलि बेला के सही समय को लेकर विद्वानों में मतभेद है। कुछ विद्वान गोधूलि बेला को सूर्यास्त से 12 मिनिट पूर्व एवं सूर्यास्त से 12 मिनिट पश्चात कुल एक घड़ी का मानते हैं वहीं कुछ विद्वानों के मतानुसार गोधूलि बेला सूर्यास्त से 24 मिनिट पूर्व व सूर्यास्त से 24 मिनिट पश्चात कुल 2 घड़ी का माना जाता है। बहरहाल, आज हमारा विषय गोधूलि बेला के समय के स्थान पर गोधूलि लग्न की ग्राह्यता पर आधारित है।

विवाह में "गोधूलि लग्न" का चयन कब करें?
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आज हम अपने पाठकों को इस विशेष जानकारी से अवगत करा रहे हैं कि विवाह गोधूलि-लग्न केवल तभी ग्रहण की जाती है जब विवाह हेतु शुद्ध दिवस का चयन होने के उपरान्त भी शुद्ध विवाह-लग्न उपस्थित ना हो। यदि विवाह वाले दिन शुद्ध लग्न उपस्थित है तो मात्र अपनी सुविधा के लिए "गोधूलि-लग्न" का चयन किया जाना शास्त्रसम्मत नहीं है। शास्त्र में यह स्पष्ट उल्लेख है कि जहां तक सम्भव हो विवाह वाले दिन शुद्ध लग्न के चयन को ही प्राथमिकता दी जानी चाहिए। शुद्ध विवाह लग्न की अनुपस्थिति में ही केवल "गोधूलि-लग्न" का चयन किया जाना चाहिए अन्यत्र नहीं।

विवाह लग्न के चयन में इन बातों का रखें ध्यान-
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विवाह लग्न का चयन करते समय निम्न बातों का विशेष ध्यान रखा जाना आवश्यक है-
1. वर एवं वधू के जन्मलग्न व जन्म राशि की अष्टम राशि विवाह लग्न नहीं होना चाहिए।
2. वर एवं वधू के जन्मलग्न से अष्टमेश विवाह लग्न में उपस्थित नहीं होना चाहिए।
3. वर एवं वधू का जन्मलग्न विवाह लग्न नहीं होना चाहिए।
4. विवाह लग्न में "लग्न-भंग" योग नहीं होना चाहिए।
5. विवाह लग्न में "कर्तरी-दोष" से पीड़ित नहीं होना चाहिए।

-ज्योतिर्विद् पं. हेमन्त रिछारिया
प्रारब्ध ज्योतिष परामर्श केन्द्र
सम्पर्क:  astropoint_hbd@yahoo.com

बुधवार, 27 फ़रवरी 2019

मेले में मज़ा नहीं आया


रौनक थी बड़ी हमें कुछ नहीं भाया,
मेले में मज़ा नहीं आया।

चहल-पहल;धक्का-मुक्की;रेलमपेल,
ऊँचे-ऊँचे झूले, बच्चों की रेल,
माँ के हाथों सा ना किसी ने झुलाया
मेले में मज़ा नहीं आया...

खाई आलू चाट; पी कोकाकोला,
ली ठंडी सोफ़्टी, चूसा बर्फ़ का गोला,
पहले जैसा स्वाद नहीं किसी में आया।
मेले में मज़ा नहीं आया...

मँहगे-मँहगे सामानों पे धावा बोला,
खूब की खरीददारी भरा अपना झोला,
खिलौनों का वो सुख मगर नहीं पाया।
मेले में मज़ा नहीं आया...


देखो ये बच्चे कैसे इठलाते हैं
मेले में आते ही खुश हो जाते हैं
हम चालीस पार अब हुए जाते हैं
दर्पण देख आज समझ ये आया
मेले में मज़ा ’क्यों’ नहीं आया।

कवि-पं. हेमन्त रिछारिया




मंगलवार, 26 फ़रवरी 2019

संहार पर मजबूरी है...


घाव जब नासूर बन जाए, गहन उपचार ज़रूरी  है,
शान्त अहिंसक भाव हमारा, संहार पर मजबूरी है।

रगों में शोणित उबला, रिपुओं का मस्तक लाने को,
देखें चंगुल से ग्रीवा की, अब कितनी दूरी है।

क्षमाशील होने को कायरता क्यों समझ लिया,
आमन्त्रण है रणांगण में तैयारी अबकी पूरी है।

कट-कट कर यों अरि गिरें ज्यों पतझर पात पके झरें
बीत चली ये तिमिर निशा प्राची देखो सिन्दूरी है।

कवि-पं. हेमन्त रिछारिया

बुधवार, 20 फ़रवरी 2019

रायचन्द

विश्व में एक विशेष प्रकार की मनुष्य जाति पाई जाती है उसका नाम है-"रायचन्द"। वैसे तो यह विश्व के सभी देशों में पाए जाते हैं किन्तु हमारे देश में रायचन्दों की मात्रा बहुतायत है। ये आपको अत्यन्त सुलभ रूप से किसी चाय-पान की दुकान, चौक-चौराहों, चौपालों, सोशल मीडिया व न्यूज़ चैनलों पर  किसी ना किसी मुद्दे अथवा समस्या पर अपनी राय देते आसानी से दिख जाएंगे। रायचन्द का मुख्य कार्य किसी भी मसले अथवा ज्वलन्त समस्या पर बिन मांगे अपनी निर्मूल्य राय का देना होता है। रायचन्द बिनमांगी राय देने में सिद्धहस्त होते हैं। किसी भी ज्वलन्त समस्या व मुद्दे पर अपनी राय तत्क्षण प्रकट करने का हुनर इन्हें बखूबी आता है, भले ही उस क्षेत्र से इनका दूर-दूर तक कोई सम्बन्ध ना हो। रायचन्द के लिए उम्र का कोई बन्धन नहीं होता, ये किसी भी उम्र के हो सकते हैं। जब भी देश अथवा कभी-कभी तो विदेश में भी कोई संकट या समस्या आती है तो उस मसले पर यह अपनी निर्मूल्य राय देकर अपने कर्तव्य का निर्वहन करने में पीछे नहीं रहते। रायचन्द "वसुधैव कुटुम्बकम" की अवधारणा में घोर विश्वास करते हैं और समूची वसुन्धरा को अपना कुटुम्ब मानते हुए विश्व के किसी भी देश के किसी भी कोने में होने वाली घटनाओं व मुद्दों पर अपनी राय प्रकट करना अपना जन्मसिद्ध अधिकार समझते हैं। एक फ़िल्मी गीत है "ना उम्र की सीमा हो, ना जन्म का हो बन्धन" किन्तु रायचन्द इसे अपने सन्दर्भ में कुछ इस प्रकार लेते हैं-"ना भौगौलिक सीमा हो, ना ज्ञान का हो बन्धन...।" अत: वे हर मुद्दे पर अपनी राय प्रकट कर अपने दायित्व का निर्वाह करते हैं जैसे अमुक देश में किस व्यक्ति का राष्ट्रपति बनना हमारे देश के फायदेमन्द होगा, देश के आर्थिक हालात को बेहतर करने के लिए वित्तमन्त्री को क्या करना चाहिए, बजट कैसा होना चाहिए, सरकारी नीतियां कैसी बननी चाहिए, पड़ोसी देशों से हमारे सम्बन्धों को कैसे सुधारा जाना चाहिए, हमारी विदेश नीति कैसी होनी चाहिए, सेना की रणनीति कैसी होनी चाहिए, क्रिकेट टीम में किस खिलाड़ी को खिलाया जाना चाहिए, अमुक फ़िल्म में अभिनेता ने कहां चूक की, निर्देशक की क्या खामी रही, संगीतकार कहां गड़बड़ी कर गया, गायक कहां बेसुरा हो गया आदि-आदि। रायचन्द कहीं भी; किसी भी क्षेत्र में अपनी राय दे सकता है। रायचन्द के लिए शिक्षा का कोई न्यूनतम स्तर तय नहीं होता, बस आपमें मुट्ठाठेली करने की प्रबल योग्यता होनी चाहिए। मुट्ठाठेली अर्थात् वार्तालाप में घुसपैठ कर अपनी बात प्रमुखता से रखना एवं उस पर अड़े रहना। इसके साथ ही थोड़ी सी निर्लज्जता यदि आपमें है, फिर तो "सोने-पे-सुहागा" वाली बात चरितार्थ हो जाती है। इसके अतिरिक्त रायचन्द का एक विशेष गुण भी होता है जो उसे आम नागरिकों से अलग "रायचन्द" जैसी विशिष्ट श्रेणी में ला खड़ा करता है, वह गुण है-अपनी राय पर स्वयं अमल ना करना। उदाहरण के तौर पर रायचन्द यदि आपको देशभक्ति पर राय दे रहे हैं तो स्वयं वे कितने बड़े देशभक्त हैं या देशहित व देश की प्रगति के लिए उन्होंने क्या-क्या कार्य किए हैं यह पूछना आपकी सेहत के लिए हानिकारक सिद्ध हो सकता है। ऐसी अशिष्टता करने से रायचन्द भड़क जाते हैं और आपको शारीरिक चोट भी पहुंचा सकते हैं। इनका कार्य केवल दूसरों को राय अर्थात् सलाह देना होता है स्वयं उस पर अमल करना नहीं। वर्तमान काल में हमारे देश में रायचन्द नामक प्रजाति तेजी से फल-फूल रही है। अब इससे देश व समाज को क्या लाभ हो रहा है यह तो कोई रायचन्द ही बेहतर बता सकता है।

-ज्योतिर्विद् पं. हेमन्त रिछारिया

सोमवार, 18 फ़रवरी 2019

दस का दम

विश्व की प्रमुख 10 मिसाईलें
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1. मिसाईल का नाम : LGM-30 माइन्यूटमैन
मारक क्षमता- 13000 कि.मी.
विशेषता- ये एक साथ 3 परमाणु हथियारों को ले जाने एवं अलग-अलग लक्ष्यों को भेदने में सक्षम है।
देश-अमेरिका

2. मिसाईल का नाम : R-36
मारक क्षमता- 10000 कि.मी. से 16000 कि.मी. तक।
विशेषता-ये मिसाईल ये एक साथ 10 से ज्यादा ठिकानों पर निशाना साधने में सक्षम है।
देश-रूस

3. मिसाईल का नाम : डोंगफेंग-41
मारक क्षमता-
14000 कि.मी. तक।
विशेषता- ये मिसाईल मैक-25 की गति से हमला करने एवं एक साथ कई लक्ष्यों को भेदने में सक्षम है। ये परमाणु हथियारों को ढोने में भी सक्षम है। इसे जल,थल, वायु कहीं से भी छोड़ा जा सकता है।
देश-चीन

4. मिसाईल का नाम : UGM-133 (ट्राइडेंट II)
मारक क्षमता- 7840 कि.मी. तक।
विशेषता- ये मिसाईल परमाणु हथियारों से लैस है व एक साथ कई लक्ष्यों को भेदने में सक्षम है। ये बैलिस्टिक मिसाइल पानी के अंदर से भी दागी जा सकती है।
देश-अमेरिका और ब्रिटेन

5. मिसाईल का नाम : BGM-109 टॉमहॉक
मारक क्षमता-
1500 कि.मी. तक।
विशेषता- ये सबसोनिक क्रूज़ मिसाइलों की श्रेणी में सबसे खतरनाक मिसाइल है।
देश-अमेरिका

6. मिसाईल का नाम : ब्रह्मोस
मारक क्षमता- 290 कि.मी. तक ।
विशेषता-
सुपरसोनिक क्रूज़ मिसाइल की श्रेणी में दुनिया की उन गिनी-चुनी मिसाइलों में से एक है, जिसे जल, थल, वायु कहीं से भी दागा जा सकता है। यह सिर्फ 10 मीटर की ऊंचाई पर उड़ने की भी क्षमता रखती है, जिसकी वजह से इसे रडार से कभी पकड़ा नहीं जा सकता। यह विश्व की सबसे खतरनाक मिसाइलों में से एक है।
देश-भारत

7.मिसाईल का नाम
: अग्नि-5
मारक क्षमता- 5500 कि.मी. से 7000 कि.मी. तक।
विशेषता- परमाणु हथियारों को ले जाने में सक्षम एवं एक साथ कई लक्ष्यों को भेद सकती है।
देश-भारत

8.मिसाईल का नाम : MIM-120 (एडवांस्ड मीडियम रेंज एयर टू एयर मिसाइल-एम्राम)
मारक क्षमता- हवा से हवा में मार करने वाली।
विशेषता- ये लगभग सभी लड़ाकू विमानों जैसे एफ-22, यूरोफाइटर टाइफून, एफ-15, एफ-16, सी-हैरियर, टोरनेडो में फिट हो सकती है तथा आंतरिक तौर पर रडार से बचने की क्षमता रखती है। भारी वारहेड ले जाने एवं एक साथ कई लक्ष्य भेदने में सक्षम है।
देश-अमेरिका

9.मिसाईल का नाम : आईरिस-टी
मारक क्षमता- 25 किमी. तक
विशेषता- लेजर गाइडेड तकनीक के दम पर ये 100 फीसदी लक्ष्य को भेदती है। यह हर तरह के लक्ष्य के साथ-साथ पानी के भीतर भी लक्ष्य को भेदने में सक्षम है।
देश-जर्मनी, ग्रीस, इटली, स्पेन

10.मिसाईल का नाम : पैथन-5
मारक क्षमता- यह बहुत कम दूरी के लक्ष्यों को कुशलता से नष्ट करती है।
विशेषता- यह दोहरे वेबबैंड फोकल प्लेन एरे(एफपीए) दृश्यता प्रणाली, आधुनिक नेविगेशन प्रणाली और एडवांस इंफ्रारेड काउंटर प्रणाली से लैस है।
देश-विश्व के 10 अधिक देश


-साभार


रविवार, 17 फ़रवरी 2019

मातृभूमि


पुलवामा हमले में शहीद हुए जवानों को सादर समर्पित रचना-
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हे मातृभूमि तेरे चरणों में अन्तिम वन्दन करता हूं,
पुष्प नहीं पर पुष्प तुल्य ये शीश समर्पित करता हूं।

मां तेरी विरहा ने मुझको बहुत रुलाया
धन्यभागी हूं मैं जो तूने पास बुलाया
जिन रक्तकणों में प्यार तेरा है
वो हर कण समर्पित करता हूं।
पुष्प नहीं पर पुष्प तुल्य ये .....

तेरा ऋणी रहा जननी मैं तो सदा जीवन में
ऋण चुकाने आऊंगा फ़िर से मानव तन में
तुझको मैं अपना हर जन्म समर्पित करता हूं।
पुष्प नहीं पर पुष्प तुल्य ये .....

धन्य वो मां जो भेजे रण में प्राणों से भी प्यारा लाल
उसकी करे जहां प्रतीक्षा कदम-कदम पर कलिकाल
काल भी मैं मर्दन करके खलभाल समर्पित करता हूं।
पुष्प नहीं पर पुष्प तुल्य ये .....

कवि-ज्योतिर्विद् पं. हेमन्त रिछारिया





शनिवार, 16 फ़रवरी 2019

सच्ची श्रद्धांजलि...


आज समूचा देश पुलवामा में हुए आतंकी हमले से स्तब्ध है। हर देशवासी की आँखें नम है। चहुँओर जहाँ आतंकियों के इस कायराना कुकृत्य की निन्दा हो रही है वहीं इस आतंकी हमले में शहीद हुए 40 वीर जवानों को श्रद्धासुमन भी अर्पित किए जा रहे हैं। देश का हर नागरिक आज यथासामर्थ्य अपने शहीदों को विदाई दे रहा है, श्रद्धांजलि दे रहा है। अधिकाँश लोग सोशल मीडिया के माध्यम से शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पण कर रहे हैं। राजनीतिक व सामाजिक पृष्ठभूमि से जुड़े व्यक्ति सभागारों व चौक-चौराहों पर श्रद्धांजलि सभा का आयोजन कर माँ भारती की सेवा करते हुए शहीद हो चुके वीर सपूतों को श्रद्धांजलि दे रहे हैं। हमारे देश में श्रद्धांजलि देने का यह सर्वाधिक सुलभ तरीका है, लेकिन क्या यह उन शहीदों के प्रति हमारी सच्ची श्रद्धांजलि है! इस पर आज विचार करना आवश्यक है। जब भी देश में इस प्रकार की घटनाएँ होती हैं हम इसी प्रकार बैनर-पोस्टर व सोशल मीडिया के माध्यम से अपनी श्रद्धांजलि का प्रकटीकरण कर अपने कर्त्तव्य का औपचारिक निर्वहन करते हुए स्वयं को संतुष्ट कर लेते हैं। क्या हमने कभी इस बात पर विचार किया है कि इस प्रकार सुलभ श्रद्धांजलि व्यक्त कर हम उन शहीदों को ही नहीं अपितु स्वयं को भी धोखा दे रहे हैं। इस प्रकार की श्रद्धांजलि एक आत्मवंचना है। मेरी यह बात आपको निश्चित ही कड़वी लगी होगी किन्तु सत्य सदैव कड़वा होता है। यदि ऐसा नहीं है तो सामान्य दिनों में हमारी दिनचर्या व आचरण अपने देश के प्रति श्रद्धा व प्रेम से परिपूर्ण क्यों नहीं होता? आख़िर हम उन शहीदों को ही तो श्रद्धांजलि देकर अपनी देशभक्ति का प्रकटीकरण कर रहें हैं जिन्होंने देशसेवा के लिए अपने प्राणों तक को न्यौछावर कर दिया। फ़िर क्यों नहीं हम उनकी शहादत से प्रेरणा लेकर अपनी दैनिक दिनचर्या व आचरण में देशभक्ति व देशसेवा को सम्मिलित करते! हम क्यों नहीं अपने राष्ट्र के प्रति निष्ठावान रहते! जब भी देश में कोई आन्दोलन या विरोध प्रदर्शन होते हैं; जिनमें से अधिकतर निजी स्वार्थ के लिए किए जाते हैं, तो हमारे द्वारा राष्ट्र की सम्पत्ति को कितना नुकसान पहुँचाया जाता है। सरकारी सम्पत्तियों, राजमार्गों, बसों, रेल इत्यादि में तोड़फ़ोड़-आगजनी यह सब हम ही तो करते हैं। शासकीय योजनाओं में भ्रष्टाचार भी हम ही करते हैं। निष्ठापूर्वक व ईमानदारी से अपना कार्य करने के स्थान पर रिश्वत लेकर कार्य हम करते हैं और सबसे बड़ी बात यह कि देशहित के स्थान पर अपने निजी हित को ध्यान में रखकर अपने वोट की नीलामी भी हम ही करते हैं। फ़िर किस मुँह से हम अपने देशभक्त होने का दम्भ भरते हैं? केवल इसलिए कि हमने शहीदों को श्रद्धांजलि देने के लिए अपने वाट्स-अप की डी.पी. में मोमबत्ती की फ़ोटो लगा ली या किसी चौक-चौराहे पर दो मिनिट का मौन रखकर तस्वीर खिंचा ली या फ़िर ऊँचे स्वर में "मुर्दाबाद" के नारे लगाकर दुश्मन देश का पुतला जला दिया। क्या इतने भर से हम देशभक्त कहलाने के अधिकारी हो जाएँगे? कितने लोग हैं जो केवल स्वदेशी सामान का उपयोग अपने दैनिक जीवन में करते हैं? कितने लोग हैं जो आतंकियों का साथ देने वाले देश की सामग्री का बहिष्कार करते हैं? कितने लोग हैं जो सेना के जवानों के लिए बस या ट्रेन में अपनी सीट छोड़ देते हैं या लाईन में स्वयं पीछे होकर उन्हें आगे कर देते हैं? मेरे देखे शहीदों की जयन्ती-पुण्यतिथि मनाना व श्रद्धांजलि कार्यक्रम करना अपनी जगह सही है लेकिन अपने शहीदों व राष्ट्र के प्रति सच्ची श्रद्धा व निष्ठा रखना उससे कहीं अधिक श्रेष्ठ बात है। यदि हम अपने शहीदों को सच्ची श्रद्धांजलि देना चाहते हैं तो उनसे प्रेरणा लेकर वह कार्य करें जिसके लिए उन्होंने अपने प्राणों तक का बलिदान दे दिया, वह है- देशप्रेम व अपने देश के प्रति निष्ठा। जिस दिन हम एक भी कार्य ऐसा करेंगे जिसका उद्देश्य निजी हित के स्थान पर देशहित होगा केवल उसी दिन हम अपने शहीदों को सच्ची श्रद्धांजलि दे पाएँगे।

-ज्योतिर्विद् पं. हेमन्त रिछारिया