कर्तव्य कह रहा चीख-चीख कर यह हमसे
हर एक सांस को एक सबक यह याद रहे,
अपनी हस्ती क्या, रहें;रहें या नहीं रहें
यह देश रहे आजाद, देश आजाद रहे।
इस देह धर्म के नाते हमको जाना है
कुछ ऐसा करके जाएं अपनी याद रहे,
आज़ाद रहे; आज़ाद रहे धरती-माता
जग से गुंजित इस माता जय नाद रहे।
-सरलजी
हर एक सांस को एक सबक यह याद रहे,
अपनी हस्ती क्या, रहें;रहें या नहीं रहें
यह देश रहे आजाद, देश आजाद रहे।
इस देह धर्म के नाते हमको जाना है
कुछ ऐसा करके जाएं अपनी याद रहे,
आज़ाद रहे; आज़ाद रहे धरती-माता
जग से गुंजित इस माता जय नाद रहे।
-सरलजी







