मेरे देखे वर्तमान समय में हिन्दुत्व फैशन बनता जा रहा है। जिस प्रकार वस्त्र, केश सज्जा आदि की जब एक विशेष प्रकार की फैशन आती तो सभी उसी फैशन का अनुसरण करने लगने में अपनी शान समझते हैं। फैशन प्रारम्भ होती है किसी प्रभावशाली व्यक्ति द्वारा....इसीलिए तो कम्पनियां बड़े-बड़े अभिनेताओं से विज्ञापन करवाती हैं ताकि आम लोग उन्हें देखकर उसका अनुसरण करें बिना इसका परीक्षण किए कि जो वह अभिनेता कह या कर रहा है वह उनके लिए उचित है भी या नहीं। वे बस उस अभिनेता का अनुसरण अपने अहंकार को तुष्ट करना चाहते हैं और करते भी हैं। धीरे-धीरे अब यही बात "हिन्दुत्व" पर भी लागू हो रही है। आज हर ग्रुप या मित्र के वाट्सअप सन्देश के माध्यम से हिन्दुत्व का तथाकथित समर्थन करते और विधर्मियों की लानत-मनामत करती खबरें आप तक निश्चय ही पहुंच रहीं होंगी। ऐसे सन्देशों का प्रामाणिकता व उद्गम (sorce) का परीक्षण किए बिना ही स्वयं को हिन्दुत्व का बड़ा पैरोकार मानने वाले अन्य समूहों व मित्रों को भेजकर हिन्दुत्व की रक्षा में तत्पर बैठे रहते हैं। पाठकों से निवेदन है कि इन समर्थकों द्वारा प्रेषित सन्देशों का तटस्थ रूप से परीक्षण करते हुए निम्न प्रश्नों का उत्तर खोजने का प्रयास कीजिए।
1. क्या मारपीट, दंगा, लूट, कानून-व्यवस्था का उल्लंघन, आदि कार्य केवल कुछ विशेष व्यक्तियों द्वारा ही किए जाते हैं या अराजक तत्वों द्वारा?
2. क्या वाट्सअप पर ऐसे सन्देश अन्य मित्रों को भेजने से इस प्रकार के कृत्यों पर रोक लगेगी?
3. क्या वाट्सअप का मंच सही व उचित जगह है या फिर पुलिस-थाना व कोर्ट?
4. इस प्रकार की सामग्री अग्रेषित करने या रिकार्ड करने वाले स्वयं उचित मन्च पर इसकी शिकायत क्यों नहीं करते?
ऐसे सन्देशों में लिखी शब्दावली को पढ़कर ही स्पष्ट हो जाता है कि जिन्हें शुद्ध हिन्दी तक लिखना नहीं आ रही वे हिन्दुत्व के पैरोकार बने बैठे है। उनकी बुद्धि का स्तर उनकी लेखनी से ही स्पष्ट हो रहा है कि वे मात्र हिन्दुत्व के फैशन से प्रभावित होकर ये सब कर रहे हैं। हर बात को एक धर्म विशेष के चश्में से देखना अब तक विधर्मियों की आदत थी अफ़सोस अब यह स्वधर्मियों की भी बनती जा रही है। हम एक अति से दूसरी अति की ओर बढ़ चले हैं और शास्त्र का बहुमूल्य वचन है-"अति सर्वत्र वर्जयेत्।"

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