यहाँ किसका कब हुआ ठिकाना है
ये दुनिया बस इक सरायख़ाना है।
कौन आएगा और जाएगा यहाँ से
रूह को तो आना ना कहीं जाना है।
वो मिला ही है तूने खोया कहाँ है
पाने का तो अच्छा इक बहाना है
मेरी सारी कोशिश यही है दानां
बूँद को समन्दर से अब मिलाना है
-ज्योतिर्विद् पं. हेमन्त रिछारिया
ये दुनिया बस इक सरायख़ाना है।
कौन आएगा और जाएगा यहाँ से
रूह को तो आना ना कहीं जाना है।
वो मिला ही है तूने खोया कहाँ है
पाने का तो अच्छा इक बहाना है
मेरी सारी कोशिश यही है दानां
बूँद को समन्दर से अब मिलाना है
-ज्योतिर्विद् पं. हेमन्त रिछारिया
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