विनम्र निवेदन-
सम्माननीय़ मतदाताओं,
विश्व में भारत एक विशाल और सम्मानित लोकतंत्र के रूप में प्रतिष्ठित है। यहां समय-समय पर चुनाव रूपी यज्ञ होते रहते हैं। जिसमें आप सभी मतदाता “मत” के रूप में अपनी आहुति डालते रहते हैं। निश्चित ही आपके द्वारा दिया गया एक “मत” आपके नगर, ग्राम, प्रदेश एवं देश के भाग्य निर्माण की क्षमता रखता है। आपका एक “मत” भारत की उन्नति व अवनति की फ़सल का बीज है। अतः इसका प्रयोग अत्य़ंत विवेकपूर्ण तरीके से होना चाहिए। जातिवाद, क्षेत्रवाद, परिवारवाद एवं धार्मिकता के आधार पर “मत” देने की अपेक्षा राष्टवाद, विकास, चरित्र एवं राजनैतिक शुचिता के अधार पर ही वोट दें। जब हम अस्वस्थ होने पर अपने चिकित्सक का चुनाव एवं गंतव्य तक पहुंचने के लिए साधन का चुनाव पूर्ण सावधानी व विवेक से करते हैं तो अपने जन-प्रतिनिधियों के चुनाव में लापरवाही क्यों? यदि आज हमारे जन-प्रतिनिधियों में अधिकांश आपराधिक पृष्ठभूमि वाले हैं तो उन्हें चुनने वाले हम ही हैं। पिछले कुछ वर्षों से राजनीति में असामाजिक तत्वों का प्रवेश बढ़ता जा रहा है। यह भारतीय लोकतंत्र के लिए स्वस्थ परम्परा की शुरूआत नहीं है। आज देश का मतदाता जागरूक नहीं है। जिसके परिणामस्वरूप सत्ता की कुंजी जनता के हाथ से फ़िसलकर चंद बिचौलियों व भ्रष्टाचारियों के हाथों में चली गई है। जो अपने स्वार्थ के लिए सरकारी तंत्र को कठपुतलियों की तरह नचाते हैं। आज सत्ता की डोर फ़िर से जनता के हाथों में लाने की आवश्यकता है। अतः पूर्ण विवेक से मतदान करें, शत-प्रतिशत मतदान करें। विवेकपूर्ण मतदान कर भारतीय लोकतंत्र को पतन के गर्त में जाने से रोकने में सहभागी बनें।
जय हिन्द...!
-“ज्योतिर्विद” हेमन्त रिछारिया
प्रारब्ध ज्योतिष परामर्श केन्द्र
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