“मासूम हाथों से निवाला खा लिया
रोज़ा टूटा; मगर दिल बचा लिया”
“तुम चाहे मुहब्बत कह लो इसे
आदत हो गई है तुम्हारी मुझे”
“ना जाने कैसा रिश्ता है तेरा मुझसे
नामुकम्मल लगती है ज़िंदगी तेरे बगैर”
“अपने हाथों से जब वो इफ़्तार कराता है
कौन है जो मुंह से निवाला छीन ले”
“जंग ऐसी भी हुई हैं ज़िंदगी में तुझसे
जिनमें तेरी हार से मेरी जीत शर्मसार है”
“मेरी आंखों में तो आए नहीं कभी
सुना है खुशी के आंसू भी होते हैं”
-हेमन्त रिछारिया
रोज़ा टूटा; मगर दिल बचा लिया”
“तुम चाहे मुहब्बत कह लो इसे
आदत हो गई है तुम्हारी मुझे”
“ना जाने कैसा रिश्ता है तेरा मुझसे
नामुकम्मल लगती है ज़िंदगी तेरे बगैर”
“अपने हाथों से जब वो इफ़्तार कराता है
कौन है जो मुंह से निवाला छीन ले”
“जंग ऐसी भी हुई हैं ज़िंदगी में तुझसे
जिनमें तेरी हार से मेरी जीत शर्मसार है”
“मेरी आंखों में तो आए नहीं कभी
सुना है खुशी के आंसू भी होते हैं”
-हेमन्त रिछारिया
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