अपने धाम प्रसन्न सुखी थे, बारिश गर्मी ठण्ड में
चारों धामों के चक्कर में, मरे उत्तराखण्ड में।
महाप्रलय ने दी होगी जब दस्तक आकर द्वारे
ईश्वर शून्य लगे होंगे मंदिर,मस्ज़िद, गुरूद्वारे।
भूख-प्यास से, मृत्यु-त्रास से, जान गए तुम होंगे
कितनी निर्मम, कितनी अक्षम होती हैं सरकारें
अपने के कंधों पर जाते, चन्दन गंध चिता में पाते
जलने भर को मिली ना लकड़ी अनुकम्पा के फण्ड में॥
-डा.विनोद निगम
चारों धामों के चक्कर में, मरे उत्तराखण्ड में।
महाप्रलय ने दी होगी जब दस्तक आकर द्वारे
ईश्वर शून्य लगे होंगे मंदिर,मस्ज़िद, गुरूद्वारे।
भूख-प्यास से, मृत्यु-त्रास से, जान गए तुम होंगे
कितनी निर्मम, कितनी अक्षम होती हैं सरकारें
अपने के कंधों पर जाते, चन्दन गंध चिता में पाते
जलने भर को मिली ना लकड़ी अनुकम्पा के फण्ड में॥
-डा.विनोद निगम
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