"हाथ ताउम्र खाशाक से भरे रहे
गौहर भी मिले तो यकीं नहीं होता"
खाशाक=कूड़ा-करकर गौहर=मोती
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"मुफ़लिसों की आरज़ू थी चांदनी बिखरे
रसूख़दारों ने महे-कामिल कैद कर लिया"
महे-कामिल=पूर्ण चंद्र
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"हर कोई निगाहों से गिरा देता है
अदने से अश्क की बिसात ही क्या"
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"जोड़-घटाना अशआरों में कीजिए
इंसा तरमीम को राज़ी नहीं होते"
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"हमने ज़रा कहा तो तिलमिला गए
लोगों को सच की आदत जो नहीं"
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"तुम छलकने का शिकवा ना करो
उसका पैमाना ही छोटा है"
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"खास होने की जद्दोजहद में लगे हैं सभी
इतना आसां भी नहीं है आम होना"
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"कद का बातों पे हुआ कुछ ऐसा असर
हमारी सब फिज़ूल, उनकी उसूल हुईं।"
-हेमन्त रिछारिया
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गौहर भी मिले तो यकीं नहीं होता"
खाशाक=कूड़ा-करकर गौहर=मोती
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"मुफ़लिसों की आरज़ू थी चांदनी बिखरे
रसूख़दारों ने महे-कामिल कैद कर लिया"
महे-कामिल=पूर्ण चंद्र
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"हर कोई निगाहों से गिरा देता है
अदने से अश्क की बिसात ही क्या"
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"जोड़-घटाना अशआरों में कीजिए
इंसा तरमीम को राज़ी नहीं होते"
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"हमने ज़रा कहा तो तिलमिला गए
लोगों को सच की आदत जो नहीं"
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"तुम छलकने का शिकवा ना करो
उसका पैमाना ही छोटा है"
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"खास होने की जद्दोजहद में लगे हैं सभी
इतना आसां भी नहीं है आम होना"
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"कद का बातों पे हुआ कुछ ऐसा असर
हमारी सब फिज़ूल, उनकी उसूल हुईं।"
-हेमन्त रिछारिया
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