" इक हसीं हमसफ़र की तौफ़ीक दे दे
मैंने कब तुझसे हरम मांगा है"
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"मैं आज तेरा हमसफ़र ना सही
कभी हम दो कदम साथ चले थे"
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"तुम मेरे नक्शे-पा मिटाते हुए चलना
कोई और ना मेरे बाद कांटों से गुज़रे"
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" अदब-औ-मुहब्बत से मिलो सबसे
जाने कौन सी मुलाकात आखिरी हो"
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"गर तू खुद को दानां समझता है
पढ़ मेरी आंखों में मेरे दिल को "
-हेमन्त रिछारिया
मैंने कब तुझसे हरम मांगा है"
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"मैं आज तेरा हमसफ़र ना सही
कभी हम दो कदम साथ चले थे"
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"तुम मेरे नक्शे-पा मिटाते हुए चलना
कोई और ना मेरे बाद कांटों से गुज़रे"
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" अदब-औ-मुहब्बत से मिलो सबसे
जाने कौन सी मुलाकात आखिरी हो"
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"गर तू खुद को दानां समझता है
पढ़ मेरी आंखों में मेरे दिल को "
-हेमन्त रिछारिया
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