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1. शास्त्र का वचन है-"तस्माच्छ्राद्धं नरो भक्त्या शाकैरपि यथाविधि" अर्थात् धनाभाव अथवा अन्य कोई प्रतिकूल परिस्थिति होने पर दिवंगत व्यक्ति के परिजन केवल शाक (हरी सब्जी, जैसे पालक इत्यादि) के माध्यम से श्राद्ध सम्पन्न कर सकते हैं। दस अथवा तेरह दिनों तक प्रतिदिन कुतपकाल (अपरान्ह 11:35 से 12:35) के मध्य गाय को शाक खिलाने से श्राद्ध की पूर्णता होती है।
शाक की अनुपलब्धता होने पर विष्णु पुराण का निर्देश है कि कुतपकाल में श्राद्धकर्ता एकान्त में खुले आकाश के नीचे जाकर अपने हाथों को आसमान की ओर उठाकर यह प्रार्थना करे-" हे मेरे प्रियजन! मेरे पास श्राद्ध करने के लिए अनुकूल परिस्थिति नहीं है किन्तु मेरे पास आपके निमित्त श्रद्धा व भक्ति है। मैं इन्हीं के द्वारा आपको संतुष्ट करना चाहता हूं और मैंने शास्त्राज्ञा में अपने दोनों हाथ आकाश में उठा रखे हैं। आप मेरी श्रद्धा व भक्ति से ही तृप्त हों।"
2. दीपदान- दस अथवा तेरह (देश-काल-लोक परम्परा अनुसार ) दिनों तक दक्षिण दिशा में अपने दिवंगत हो चुके प्रियजन के लिए तिल के तेल (तिल के अभाव में किसी भी तेल) का दीपक प्रज्जवलित करें।
नारायबलि कर्म-
उपर्युक्त वर्णित शास्त्रोक्त निर्देश आपत्तिकाल के लिए त्वरित करने योग्य कर्म हैं किन्तु इनके करने मात्र से विधिवत् अन्तिम-संस्कार ना किए जाने सम्बन्धी दोष का निवारण तब तक नहीं होगा जब तक कि इस निमित्त "नारायणबलि कर्म" को सम्पन्न ना कर लिया जाए क्योंकि ऐसे व्यक्ति जिनका शास्त्रोक्त रीति से विधिवत् अन्तिम-संस्कार नहीं किया जाता है वे सभी "दुर्मरण" की श्रेणी में आते हैं एवं "दुर्मरण" वाले व्यक्तियों के निमित्त "नारायणबलि" कर्म का किया जाना अत्यन्त आवश्यक होता है। शास्त्रानुसार "नारायणबलि" कर्म ना करने से दिवंगत आत्मा को सद्गति प्राप्त नहीं होती है। "नारायणबलि" कर्म परिस्थिति सामान्य होने के उपरान्त किसी भी श्राद्धपक्ष में सम्पन्न किया जा सकता है। यदि "नारायणबलि" कर्म किसी तीर्थक्षेत्र या पवित्र नदी के तट पर दिवंगत होने की तिथि से तीन वर्षों के अन्दर सम्पन्न किया जाता है तो इसके शुभफल में अतीव वृद्धि होती है एवं दिवंगत व्यक्ति को सद्गति प्राप्त होने में किसी प्रकार का संशय नहीं रह जाता है। अत: हमारा पाठकों से विशेष निवेदन है कि जिनके परिजन भी "कोरोना" महामारी से दिवगंत हुए हो वे अपनी सुविधानुसार उनके निमित्त "नारायणबलि" कर्म अवश्य सम्पन्न करें जिससे उन्हें सद्गति प्राप्त हो।
-ज्योतिर्विद् पं. हेमन्त रिछारिया
प्रारब्ध ज्योतिष परामर्श केन्द्र
सम्पर्क: astropoint_hbd@yahoo.com




