मंगलवार, 3 सितंबर 2019

क्यों कहते हैं "गणपति बप्पा मोरया"...!



गणपति बप्पा मोरया, मंगलमूर्ति मोरया " का जयकारा हमेशा ही सुनायी देता है। कई बार आपने भी ये जयकारा लगाया होगा लेकिन क्या कभी आपने ये सोचा है कि आखिर ये जयकारा क्यों लगाते हैं? कहां से इस जयकारे की उत्पति हुई? इसके पीछे एक ऐतिहासिक तथ्य है। गणपतिजी के इस जयकारे की जड़ें महाराष्ट्र के पुणे से 21 किमी. दूर बसे चिंचवाड़ गांव में हैं। चिंचवाड़ जन्मस्थली है एक ऐसे संत की जिसकी भक्ति और आस्था ने लिख दी एक ऐसी कहानी, जिसके बाद उनके नाम के साथ ही जुड़ गया गणपति का भी नाम। पंद्रवी शताब्दी में एक संत हुए, जिनका नाम था मोरया गोसावी, कहते हैं भगवान गणेश के आशीर्वाद से ही मोरया गोसावी का जन्म हुआ था और मोरया गोसावी भी अपने माता-पिता की तरह भगवान गणेश की पूजा अराधना करते थे। हर साल गणेश चतुर्थी के शुभ अवसर पर मोरया चिंचवाड़ से मोरगांव गणेश की पूजा करने के लिए पैदल जाया करते थे। कहा जाता है कि बढ़ती उम्र की वजह से एक दिन खुद भगवान गणेश उनके सपने में आए और उनसे कहा कि उनकी मूर्ति उन्हें नदी में मिलेगी और ठीक वैसा ही हुआ, नदी में स्नान के दौरान उन्हें गणेश जी की मूर्ति मिली। इस घटना के बाद लोग ये मानने लगे कि मोरया गोसावी गणपति बप्पा के सच्चे व अनन्य भक्त हैं। तभी से भक्त चिंचवाड़ गांव में मोरया गोसावी के दर्शन के लिए आने लगे। कहते हैं जब कोई भक्त मोरया गोसावी जी के पैर छूते तो संत मोरया अपने भक्तों से मंगलमूर्ति कहते थे और फिर ऐसे शुरुआत हुई मंगलमूर्ति मोरया की। जो जयकारा पुणे के पास चिंचवाड़ गांव से शुरू हुआ आज वो जयकारा पूरे देश में गणपति बप्पा के भक्तों द्वारा लगाया जाता है। पुणे के चिंचवाड़ में मोरया गोसावी का मंदिर भी है जहां प्रतिदिन भक्त मत्था टेकने आते हैं। मोरया गोसावी मंदिर में साल में दो बार विशेष उत्सव का आयोजन किया जाता है। एक तो भाद्रपद महीने में व दूसरा माघ महीने में जब मंदिर से पालकी निकलती है, जो मोरगांव के गणपति मंदिर में दर्शनों के लिए ले जायी जाती है। उसी तरह दूसरा उत्सव दिसंबर महीने में चिंचवाड़ गांव में ही मनाया जाता है जब बड़ी संख्या में देशभर से श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं और दिनभर चलने वाले धार्मिक कार्यक्रमों का हिस्सा बनते हैं। मान्यता है कि मोरया गोसावी मंदिर में आने से अष्टविनायक के दर्शन-पूजन के समान पुण्य की प्राप्ति होती है। इस मंदिर में न केवल बप्पा का अद्भुत रूप विराजमान है बल्कि बप्पा के परम भक्‍त मोरया गोसावी के साथ-साथ उनके आठ वंशजों की समाधि भी है जो गणपति के प्रति इनकी आस्था की कहानी सुनाती है।

-(डा.सुनील जोशी जी की फ़ेसबुक पेज से साभार)

शुक्रवार, 23 अगस्त 2019

दैनिक राशिफल का सच...!

आप सभी ने न्यूज़ चैनलों समाचार पत्रों में नित्य प्रसारित प्रकाशित होते दैनिक राशिफल को तो अवश्य देखा सुना होगा। आजकल अधिकांश व्यक्ति प्रात:काल समाचार पत्र में सर्वप्रथम दैनिक राशिफल वाले स्तंभ में अपनी राशि का फलित देखकर अपने दिन का पूर्वानुमान लगाने में उत्सुक रहते हैं और सांझ ढ़लते ही महसूस करते हैं कि उनकी राशि का जो फ़लित दैनिक राशिफल में बताया गया था वह तो असत्य निकला। इसके बाद वे ज्योतिष शास्त्र को कोसने लगते हैं। यह एक सामान्य प्रक्रिया है। आज हम पाठकों को दैनिक राशिफल से जुड़ी कुछ महत्त्वपूर्ण प्रामाणिक जानकारियां देने जा रहे हैं। हम अपने पाठकों को बताना चाहते हैं कि आजकल जिस प्रकार दैनिक राशिफल बताया जाता है वह पूर्णत: भ्रामक अप्रामाणिक होता है। उसका कोई शास्त्रोक्त ज्योतिषीय आधार नहीं होता। यही वजह है कि करीब-करीब 99 फ़ीसदी दैनिक राशिफल का फलित असत्य निकलता है। जिन व्यक्तियों का फलित सही होता भी है वह उनकी निजी जन्मपत्रिका की ग्रहस्थितियों, दशाओं ग्रह-गोचर का परिणाम होता है। आप निश्चित ही यह बात सुनकर चौंक जाएंगे। कुछ विद्वान इससे अपनी भिन्न राय भी रखेंगे किन्तु हम यहां आपके विचार हेतु कुछ तथ्य प्रस्तुत करना चाहते हैं जिनके अध्ययन से आप स्वयं दैनिक राशिफल की प्रामाणिकता का अंदाज़ा लगा सकते हैं।
1. ग्रह गोचर-
ज्योतिष शास्त्र में फलित के लिए ग्रहस्थिति मुख्यरूपेण उत्तरदायी होती है, चाहे वह जन्मपत्रिका की ग्रहस्थिति हो या गोचर की। ज्योतिष के गोचर शास्त्र के अनुसार ग्रह गोचर अर्थात ग्रहों का राशि परिवर्तन प्रतिदिन नहीं होता। समस्त नौ ग्रहों के गोचर का अलग-अलग काल है जिनमें सूर्य,बुध,शुक्र लगभग 1 माह, मंगल 57 दिन, गुरू 1 वर्ष, राहु-केतु 1.5 (डेढ़) वर्ष, शनि ढाई (2.5) वर्ष में अपनी राशि परिवर्तन करते हैं। अब बात करें चन्द्रमा के गोचर की तो चन्द्रमा भी सवा दो दिन में अपनी राशि परिवर्तन करते हैं। इसका आशय यह हुआ कि सवा दो दिनों तक तो ग्रहस्थितियों में परिवर्तन नहीं होगा। यदि किसी ग्रह का गोचर हुआ भी तो अगले दिन से लेकर पुन: तीन दिनों तक वही स्थिति रहेगी, जो ग्रह जिस राशि में स्थित है उसी राशि में रहेगा तो ऐसे समान ग्रहस्थिति के आधार पर फलित प्रतिदिन कैसे परिवर्तित हो सकता है आप स्वयं सोचिए!

2. जन्मपत्रिका सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण-
ज्योतिष शास्त्र में किसी जातक के फलित के लिए उसकी जन्मपत्रिका की लग्न कुण्डली को सर्वाधिक महत्ता प्रदान की गई है तत्पश्चात नवमांश कुण्डली, उसके बाद वर्ग कुण्डली, फ़िर विंशोत्तरी दशाएं, उसके बाद योगिनी दशाएं और सबसे अन्त में गोचर को मान्यता दी गई है। जब गोचर को ही फलित करते समय सबसे अन्तिम पायदान पर रखा जाता है तो केवल चन्द्र के गोचर नक्षत्र से दैनिक राशिफल निकालना कहां तक उचित प्रामाणिक है।

3. दैनिक राशिफल भी होता है-
अब उपर्युक्त आधार पर क्या यह मान लिया जाए कि ज्योतिष शास्त्र में दैनिक राशिफल होता ही नहीं है; नहीं ऐसा कदापि नहीं है। दैनिक राशिफल भी ज्योतिष शास्त्र के अन्तर्गत ही आता है किन्तु वह प्रत्येक जातक का निजी होता है और उसका आधार प्रश्न कुण्डली नष्टजातकम पद्धति होता है। उस दैनिक राशिफल के लिए व्यक्ति को ज्योतिषी से प्रश्न करना होता है कि "मेरा आज का दिन कैसा रहेगा?" तब ज्योतिषी प्रश्न कुण्डली के आधार पर अथवा उस व्यक्ति से कोई अंक पूछकर उसके दिन के बारे गणना कर उस दिन का भविष्य संकेत उसे देता है। इस प्रकार का दैनिक राशिफल व्यक्तिगत होता ना कि सार्वजनिक। अत: हमारे मतानुसार समाचार पत्रों न्यूज़ चैनलों में प्रसारित-प्रकाशित होने वाले दैनिक राशिफल के फलित को गंभीरता से ना लेते हुए अपनी जन्मपत्रिका की ग्रहस्थितियों, दशाओं अपनी राशि गोचर पर अधिक विश्वास करना चाहिए। यदि किसी दिन के बारे में जानना बहुत आवश्यक हो तो किसी विद्वान दैवज्ञ से प्रश्न कर इस सम्बन्ध में निर्णय करना अधिक श्रेयस्कर लाभदायक रहता है।

-ज्योतिर्विद् पं. हेमन्त रिछारिया
प्रारब्ध ज्योतिष परामर्श केन्द्र
सम्पर्क: astropoint_hbd@yahoo.com