मंगलवार, 28 अगस्त 2018

अन्त:करण में भी कृष्ण प्रकट हों

भाद्रपद मास की कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को देश के कोने-कोने में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का उत्सव मनाया जाता है। इसी प्रकार अन्य देवी देवताओं के भी जन्मोत्सव व प्राकट्योत्सव मनाए जाते हैं। मेरे देखे यह बहुत सांकेतिक है जिससे जीव को यह स्मरण बना रहे कि उसे अपने अन्त:करण में भी एक दिन परमात्मा का प्राकट्य करना है। इस सन्दर्भ में श्रीकृष्ण के प्राकट्योत्सव की कथा बहुत ही महत्वपूर्ण है क्योंकि श्रीकृष्ण का जन्म आततायी कंस के कारागार में मध्यरात्रि में हुआ। मनुष्य का अन्त:करण भी विकारों एक कारागार है जिसमें षड्विकारों के पहरेदार सदैव तैनात रहते हैं। जब मनुष्य के मन में विकार हो तो उसे अन्धकार घेर लेता है। इस स्थिति में जब अन्त:करण में परमात्मा का प्राकट्य होता है तब ठीक श्रीकृष्ण जन्म के जैसे ही हमारे विकारों के बन्धन स्वत: ही कट जाते हैं और हमारे अन्त:करण का कारागार स्वयमेव खुल जाता है। श्रीकृष्ण के जन्म कथा बहुत ही प्रेरक है अत: हम लौकिक रूप से तो यह पर्व अवश्य मनाएं किन्तु हमारा प्रयास यह हो कि एक दिन हमारे अन्त:करण रूपी कारागार में भी श्रीकृष्ण का प्राकट्य हो।
!!वृन्दावन बिहारीलाल की जय!!
!!जय जय श्री राधे!!

-ज्योतिर्विद पं. हेमन्त रिछारिया

बुधवार, 22 अगस्त 2018

रक्षाबन्धन



भाई-बहन के स्नेह का त्यौहार रक्षाबन्धन प्रतिवर्ष श्रावण मास की पूर्णिमा को मनाया जाता है। इस पर्व के पीछे कई पौराणिक कथाएं प्रचलित हैं। एक पौराणिक कथा के अनुसार देवी लक्ष्मी ने सर्वप्रथम दैत्यराज बलि को राखी बांधकर अपना भाई बनाया था। व्यावहारिक रूप में देखें तो रक्षाबन्धन भाई-बहन के मध्य प्रेम व स्नेह का पर्व है। इस दिन बहनें अपने भाई के मस्तक पर तिलक लगा कर उनकी कलाई पर रक्षासूत्र (राखी) बांधती हैं। वहीं भाई इस दिन अपनी बहन को उसकी सर्वत्र रक्षा करने का वचन देता है। हमारे सनातन धर्म में सामाजिक व पारिवारिक ताने-बाने को सुदृढ़ रखने के लिए ऐसी कई प्रथाएं प्रचलित हैं जो सामाजिक व पारिवारिक सौहार्द के लिए बड़ी कारगर साबित हुई हैं। प्राचीन काल से सहोदर (सगे) भाई-बहन के अभाव में मुंहबोले भाई-बहनों का सम्बन्ध प्रचलित है। जिनके मध्य किसी प्रकार का रक्त सम्बन्ध ना होकर केवल "राखी" का सम्बन्ध हुआ करता है। यह पर्व विशुद्ध प्रेम का पर्व है। आज के दौर में जहां नारी को केवल भोग्य वस्तु मानकर उसका यत्र-तत्र-सर्वत्र अनादर किया जाने लगा है वहीं हमारे सनातन में धर्म में रक्षाबन्धन पर्व के माध्यम से नारी के सम्मान की रक्षा का निर्देश है।
आईए जानते हैं इस वर्ष 2018 में रक्षाबन्धन का पर्व कब मनाया जाएगा-
इस वर्ष रक्षाबन्धन का पर्व प्रतिवर्षानुसार श्रावण शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि दिनांक 26 अगस्त 2018 को मनाया जाएगा। इस वर्ष रक्षाबन्धन के दिन पंचक रहेगा क्योंकि इस माह पंचक 25 अगस्त से प्रारम्भ होकर दिनांक 30 अगस्त तक रहेंगे। रक्षाबन्धन के दिन दोपहर 12 बजकर 35 मिनिट तक "धनिष्ठा" नक्षत्र रहेगा तत्पश्चात् "शतभिषा" नक्षत्र प्रारम्भ होगा। ये दोनों ही नक्षत्र पंचक कारक है। अत: इस बार राखी पंचककाल में ही बंधेगी।

-ज्योतिर्विद् पं. हेमन्त रिछारिया
प्रारब्ध ज्योतिष परामर्श केन्द्र
सम्पर्क: astropoint_hbd@yahoo.com
                                                                                                                                                                                                         

मंगलवार, 21 अगस्त 2018

पोखरण परमाणु विस्फोट: सिंहावलोकन

 
1. दिनांक व समय- 11 मई (सोमवार) एवं 13 मई (बुधवार) दोपहर 3 बजकर 45 मिनिट 47 सेकण्ड।
2. स्थान- पोखरण (राजस्थान)
3. परीक्षण का प्रकार-  
(i) विमान के पंखों के नीचे से ले जाकर गिराया जाने वाला (Conventional Atom Bomb) अणु बम।
(ii) प्रक्षेपास्त्र (राकेट) के अग्रभाग (Neuclear Warhead) जैसा कम भारवाहक क्षमतावाला।
(iii) थर्मो न्यूक्लियर (Thermo Neuclear) डिवाइस जिससे हाईड्रोजन बम बनाया जा सकता है।
4. नियन्त्रण कक्ष- घटनास्थल से 5 किमी दूर स्थित था।
5. नेतृत्व- परमाणु परीक्षण दल का नेतृत्व सुविख्यात वैज्ञानिक एवं भारत के पूर्व राष्ट्रपति डा. .पी.जे.अब्दुल कलाम कर रहे थे। उनके साथ दल में डा. चिदम्बरम और डा. काकोड़कर सहित लगभग 250 सदस्य शामिल थे।
6. प्रथम परीक्षण- भारत ने अपना पहला परमाणु परीक्षण वर्ष 1974 में किया था। अपने प्रथम परमाणु परीक्षण के 24 वर्षों के लम्बे अन्तराल के बाद यह भारत दूसरा सफलतम परमाणु परीक्षण था।
7. न्यूक्लियर कार्पोरेशन की स्थापना- आजादी के तुरन्त पश्चात् भारत में वर्ष 1948 "न्यूक्लियर कार्पोरेशन" (Neuclear Corporation) की स्थापना हुई। इसके बाद वर्ष 1951 में एटमिक एस्टाब्लिशमेन्ट (Atomic Establishment) की शुरुआत हुई। वर्ष 1955 में इसका नामकरण प्रसिद्ध वैज्ञानिक डा. भाभा के नाम पर "भाभा एटमिक रिसर्च सेन्टर"( Bhabha Atomic Research Center, BARC) किया गया।
8. पाठ्यक्रम का प्रारम्भ- वर्ष 1951 में भविष्य की आवश्यकताओं संभावनाओं को दृष्टिगत रखते हुए बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय और इलाहाबाद विश्वविद्यालय में न्यूक्लियर फ़िजिक्स (Neuclear Physics) नामक विभाग का प्रारम्भ किया गया। जिसके अन्तर्गत एक स्नातक स्तर का पाठ्यक्रम प्रारम्भ हुआ। विशेष बात यह है कि इस पाठ्यक्रम के लिए वहां उस समय कोई भी प्रयोगशाला नहीं थी।
9. रिएक्टर- वर्ष 1955 में देश में ब्रंग (Brung) नामक एक्सपेरिमेन्टल रिएक्टर (Experimental Reactor) आया। जो केवल प्रयोगशाला में प्रयोग के लिए ही उपयुक्त था। वर्ष 1990 तक भारत ने आश्चर्यजनक रूप से प्रगति करते हुए 21 रिएक्टर (Reactor), 8 हेवी वाटर उत्पादन प्लांट और एक स्वयंपूर्ण अत्याधुनिक टेस्ट रेंज (Test Range) का निर्माण कर लिया था।
10. यूरेनियम की अनुपलब्धता- परमाणु बम के लिए आवश्यक यूरेनियम भारत में उपलब्ध नहीं था। केरल के समुद्र तट की रेत में थोरियम नाम का एक रेडियोएक्टिव तत्व विपुल मात्रा में प्राप्त हुआ। थोरियम पर प्रयोग कर यूरेनियम प्राप्त करने पद्धति अत्यधिक मंहगी और कठिन थी किन्तु फ़िर भी हमने उपलब्ध सामग्री से ही अनुसन्धान कर इस दिशा में प्रगति की।
11. गोपनीयता- पोखरण परमाणु विस्फोट की जानकारी इस अभियान में शामिल सदस्यों उनके परिजनों के लिए भी गोपनीय रखी गई। इस अभियान में शामिल सदस्यों को विमान में बैठने तक इस अभियान के बारे में कुछ भी पता नहीं था। अमेरिका ने भारत के प्रथम परमाणु परीक्षण के बाद हमारी सैन्य गतिविधियों पर नज़र रखने के लिए तीन जिओ स्टेशनरी और एक जियो सिन्क्रोनाइज़ उपग्रह छोड़े थे। इसके बाद भी अमेरिका को इन उपग्रहों से कोई सहायता नहीं मिली और ना ही अमेरिकी खुफ़िया ऐजेंसी सी.आई..(CIA) को उसके ज़मीनी तन्त्र से कोई सूचना प्राप्त हुई।
इस घोर असफलता के लिए अमेरिका ने एक जांच समीति का भी गठन किया जिसके अध्यक्ष ने अपने एक लेख में बड़ी महत्त्वपूर्ण बात कही थी-"We could not turn even one Indian towards us" अर्थात् हमने एक भी भारतीय को अपनी तरफ़ मोड़ने में सफ़लता प्राप्त नहीं की।
12. अनुमति- 11 अप्रैल 1998 को डा. चिदम्बरम ने बताया कि अणु परीक्षण की अनुमति मिल गई है। लेकिन हमें एक नहीं अपितु पाँचो डिवाईसीस का परीक्षण करना है। महज़ एक महीने की परीक्षण पूर्व तैयारी के पाँच परीक्षण करना एक बड़ी चुनौती थी।
13. परीक्षण पूर्व तैयारी- परीक्षण के 200 मीटर गहरा कुआ चाहिए था। जो साठ मंजिला भवन के समकक्ष होता है। इसके अन्दर उपकरणों की व्यवस्था करना, अलग-अलग ऊंचाई पर सेन्सर्स लगाना और सदस्यों उपकरणों के आने-जाने के लिए लिफ़्ट भी चाहिए थी। लेकिन बंगाल इन्जीनियरिंग ट्रुप के जवानों द्वारा इस चुनौतीपूर्ण कार्य को निश्चित समयावधि सफ़लतापूर्वक पूर्ण कर लिया गया।
14. परीक्षण का दिन- इस अभियान का नेतृत्व कर रहे डा. कलाम ने परीक्षण का दिन तय किया था।
15. तापमान- मई में पोखरण का तापमान 46 से लेकर 52 डिग्री तक होता है।
16. बजट- इस अभियान के लिए भारत सरकार द्वारा केवल वर्ष 1985 से लेकर 1999 तक कुल 1500 करोड़ का बजट निर्धारित किया गया था। जो बहुत ही कम था।
17. रोचक तुलना- एक व्यापारिक सर्वेक्षण के अनुसार भारत में अप्रैल से मई के मध्य ग्रीष्मकाल में शीतलपेय की बिक्री से लगभग 900 करोड़ रु. का मुनाफ़ा विदेशी कम्पनियों को प्रतिवर्ष होता है। जबकि देश की सुरक्षा से जुड़े इतने महत्त्वपूर्ण अभियान के लिए 14 वर्षों में महज़ 1500 करोड़ रु. का बजट उपलब्ध कराया गया था। ज़रा विचार कीजिए कि स्वदेशी वस्तुओं का उपयोग ना करने के कारण हमारे देश की अर्थव्यवस्था को कितना भारी नुकसान उठाना पड़ता है।
18. सफ़ल परीक्षण- उपर्युक्त सभी चुनौतियों पर विजय प्राप्त कर अन्तत: भारत ने 11 और 13 मई 1998 के दिन पोखरण में परमाणु बम का सफ़ल परीक्षण कर इतिहास में स्वर्णाक्षरों में लिखी जाने वाली ऐतिहासिक कहानी रच डाली।
-(साभार:विजय संकेत)

विशेष- उपर्युक्त सभी तथ्य पोखरण परमाणु परीक्षण दल के सदस्य के वार्तालाप के आधार पर लिखी अद्वितीय पुस्तक "विजय-संकेत" से लिए गए हैं। यह पुस्तक पाठकगण अर्चना प्रकाशन, दीनदयाल परिसर के समीप, एम.पी.नगर, भोपाल (.प्र.) से प्राप्त कर सकते हैं।
!!जय हिन्द!!

तत्तकालीन प्रधानमन्त्री "भारत-रत्न" श्री अटल बिहारी वाजपेयी पत्रकारों को 11-13 मई 1998 को पोखरण में हुए परमाणु परीक्षणों की जानकारी देते हुए-                                                    
                                        
                                                          

प्रस्तुति-पं. हेमन्त रिछारिया