भाद्रपद मास की कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को देश के कोने-कोने में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का उत्सव मनाया जाता है। इसी प्रकार अन्य देवी देवताओं के भी जन्मोत्सव व प्राकट्योत्सव मनाए जाते हैं। मेरे देखे यह बहुत सांकेतिक है जिससे जीव को यह स्मरण बना रहे कि उसे अपने अन्त:करण में भी एक दिन परमात्मा का प्राकट्य करना है। इस सन्दर्भ में श्रीकृष्ण के प्राकट्योत्सव की कथा बहुत ही महत्वपूर्ण है क्योंकि श्रीकृष्ण का जन्म आततायी कंस के कारागार में मध्यरात्रि में हुआ। मनुष्य का अन्त:करण भी विकारों एक कारागार है जिसमें षड्विकारों के पहरेदार सदैव तैनात रहते हैं। जब मनुष्य के मन में विकार हो तो उसे अन्धकार घेर लेता है। इस स्थिति में जब अन्त:करण में परमात्मा का प्राकट्य होता है तब ठीक श्रीकृष्ण जन्म के जैसे ही हमारे विकारों के बन्धन स्वत: ही कट जाते हैं और हमारे अन्त:करण का कारागार स्वयमेव खुल जाता है। श्रीकृष्ण के जन्म कथा बहुत ही प्रेरक है अत: हम लौकिक रूप से तो यह पर्व अवश्य मनाएं किन्तु हमारा प्रयास यह हो कि एक दिन हमारे अन्त:करण रूपी कारागार में भी श्रीकृष्ण का प्राकट्य हो।
भाई-बहन के स्नेह का त्यौहार रक्षाबन्धन प्रतिवर्ष श्रावण मास
की पूर्णिमा को मनाया जाता है। इस पर्व के पीछे कई पौराणिक कथाएं प्रचलित हैं। एक पौराणिक
कथा के अनुसार देवी लक्ष्मी ने सर्वप्रथम दैत्यराज बलि को राखी बांधकर अपना भाई बनाया
था। व्यावहारिक रूप में देखें तो रक्षाबन्धन भाई-बहन के मध्य प्रेम व स्नेह का पर्व
है। इस दिन बहनें अपने भाई के मस्तक पर तिलक लगा कर उनकी कलाई पर रक्षासूत्र (राखी)
बांधती हैं। वहीं भाई इस दिन अपनी बहन को उसकी सर्वत्र रक्षा करने का वचन देता है।
हमारे सनातन धर्म में सामाजिक व पारिवारिक ताने-बाने को सुदृढ़ रखने
के लिए ऐसी कई प्रथाएं प्रचलित हैं जो सामाजिक व पारिवारिक सौहार्द के लिए बड़ी कारगर
साबित हुई हैं। प्राचीन काल से सहोदर (सगे) भाई-बहन के अभाव में मुंहबोले भाई-बहनों
का सम्बन्ध प्रचलित है। जिनके मध्य किसी प्रकार का रक्त सम्बन्ध ना होकर केवल
"राखी" का सम्बन्ध हुआ करता है। यह पर्व विशुद्ध प्रेम का पर्व है। आज के
दौर में जहां नारी को केवल भोग्य वस्तु मानकर उसका यत्र-तत्र-सर्वत्र अनादर किया जाने
लगा है वहीं हमारे सनातन में धर्म में रक्षाबन्धन पर्व के माध्यम से नारी के सम्मान
की रक्षा का निर्देश है।
आईए जानते हैं इस वर्ष 2018 में रक्षाबन्धन का पर्व कब मनाया जाएगा-
इस वर्ष
रक्षाबन्धन का पर्व प्रतिवर्षानुसार श्रावण शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि दिनांक 26 अगस्त 2018 को मनाया जाएगा। इस वर्ष रक्षाबन्धन के दिन
पंचक रहेगा क्योंकि इस माह पंचक 25 अगस्त से प्रारम्भ होकर दिनांक
30 अगस्त तक रहेंगे। रक्षाबन्धन के दिन दोपहर 12 बजकर 35 मिनिट तक "धनिष्ठा" नक्षत्र रहेगा
तत्पश्चात् "शतभिषा" नक्षत्र प्रारम्भ होगा। ये दोनों ही नक्षत्र पंचक कारक
है। अत: इस बार राखी पंचककाल में ही बंधेगी।
इसघोरअसफलताकेलिएअमेरिकानेएकजांचसमीतिकाभीगठनकियाजिसकेअध्यक्षनेअपनेएकलेखमेंबड़ीमहत्त्वपूर्णबातकहीथी-"We could not turn
even one Indian towards us" अर्थात्हमनेएकभीभारतीयकोअपनीतरफ़मोड़नेमेंसफ़लताप्राप्तनहींकी।