प्रसिद्ध विचारक फ्रायड ने कहा था कि "हिंदुस्तान ने काम को ज़हर देकर मारने कोशिश की है मगर काम ज़हरीला होकर ज़िंदा है।" फ्रायड ने ठीक ही कहा था । आज जब-जब भी कोई कामुक विकृति से जुड़ी ख़बर आती है तो मुझे ओशो याद आ जाते है। वे अकेले ऐसे संबुद्ध व्यक्ति थे जिन्होंने इस ज्वलंत मुद्दे पर कुछ कहने का साहस जुटाया था। मगर अफ़सोस इस देश व दुनिया के अधिकतर लोगों ने उन्हें नहीं समझा जिसका दुष्परिणाम आज हम सब भुगत रहे हैं। ओशो हमेशा कहते थे कि काम का दमन नहीं वरन अतिक्रमण करो, जागरण करो। उनके अनुसार होशपूर्वक किया काम ही काम से मुक्ति है। आज हमारे चारों दमन सिखाया जा रहा है जिसके फलस्वरूप उर्जा विकृत होकर अत्यंत घृणित रूप से बाहर आ रही है। केवल मनुष्य ही है जो २४ घंटे कामुक रह सकता है क्योंकि पशु-पक्षियों की तो ऋतु होती है जिसमें वे कामुक होते हैं। उर्जा तो एक ही है उसे "काम" कहें या "राम"। राम से यहां तात्पर्य उर्जा के उर्द्धगमन से है। उर्जा का नियम है यदि वो ऊपर नहीं जाएगी तो नीचे जान शुरू कर देगी जो कि सहज मार्ग है। चढ़ने में हमेशा कठिनाई होती है गिरना हमेशा से सरल रहा है। जब तक हम इस उर्जा को रूपांतरित कर उर्द्धगमन में संलग्न नहीं कर देते तब तक इस प्रकार की यौन दुर्बलताओं से निजात नहीं पा सकते। दमन तो सिर्फ और सिर्फ उर्जा को विकृत ही करता है इसलिए दमन नहीं वरन जागरण।
सामाजिक,सांस्कृतिक व राष्ट्रवादी धरोहरों की सजग प्रहरी ई-पत्रिका/ सम्पादक- हेमन्त रिछारिया
बुधवार, 10 जुलाई 2013
मंगलवार, 18 जून 2013
रविवार, 16 जून 2013
राष्ट्रवाद बनाम छ्द्म धर्मनिरपेक्षता
आख़िरकार जदयू-भाजपा गठबंधन टूट गया। दोनों दलो की विचार हौदियां (थिंक टैंक) इससे होने वाले नफ़ा नुकसान का आंकलन करने में जुट गए। राजनीतिक पंडितों और न्यूज़ चैनलों को लंबे समय तक चलाने के लिए मसाला मिल गया। लेकिन इन सब के बीच देशहित का क्या? जनहित का क्या? जिस मुद्दे को इस अलगाव का आधार बनाया गया है वह एक छ्द्म आधार है। नितीश भले ही कितनी सफ़ाई दें पर जब भी ये सवाल खड़ा होगा कि यदि धर्मनिरपेक्षता का इतना ही ख़्याल था तो उस समय ही अलग हो जाते जिस समय गुजरात में दंगे हो रहे थे। भले ही वाजपेयीजी का बहाना बनाकर नितीश इसका जवाब देने की असफल कोशिश करें लेकिन वाजपेयी जी को सक्रिय राजनीति से दूर हुए भी काफी वक्त गुज़र चुका है, तब अलग हो जाते! खैर, वो कोई मोदी या धर्मनिरपेक्षता के कारण अलग नहीं हुए हैं ये वो भी जानते हैं। परन्तु इस देश की जनता तो सदियों से मूढ़ समझी जाती रही है और उसका आचरण भी कमोबेश वैसा ही है। ये बात मेरी समझ से परे है कि कैसे हिंदुत्व की बात करना सांप्रदायिक है और अल्पसंख्यकों की बात; और उनमें भी सिर्फ़ और सिर्फ़ मुस्लिमों की बात करना धर्मनिरपेक्षता। पता नहीं इस देश की जनता ये क्यों नहीं सोच पाती। भाजपा ने भी समय-समय पर गंभीर गल्तियां की हैं जिसकी वजह से आज उसकी ये हालत है। ज़रा याद कीजिए वाजपेयीजी का वो दौर जब उन्होंने एक वोट के कारण सरकार की बलि चढ़ा दी मगर सिद्धांतों से समझौता नहीं किया। आखिर क्यों भाजपा अगला चुनाव "राष्ट्रवाद बनाम भ्रष्टाचार;राजद्रोह;अराजकता;छद्म धर्मनिरपेक्षता" जैसे मुद्दों पर नहीं लड़ती? विपक्षी आरोप लगाते हैं कि आप सांप्रदायिक हैं और आप चल पड़ते हैं सफ़ाई देने। आप क्यों इस बात को नहीं कहते इस राष्ट्र के हित में जो भी हैं वो सब हमारे हैं और जो राष्ट्रहित के विरोधी हैं वो हमारे शत्रु हैं। आप देश के सामने उचित व सही तथ्यों को रखिए। जब भी गुजरात दंगों की बात आती है तो आप क्यों गोधरा का ज़िक्र करना भूल जाते हैं? यहां मेरा तात्पर्य ये कतई नहीं गुजरात में जो हुआ वह सही है। परन्तु गोधरा में जो हुआ वह भी सही नहीं था। बहरहाल, ये राजनेताओं की चालें हैं और वो अपने निजी लाभ के लिए इन्हें चलते रहेंगे। मेरी सभी देशवासियों से अपील है कि वो इन छद्म चेहरों को जल्द से जल्द पहचान ले और राष्ट्रहित को ध्यान में रखकर अपनी अगली सरकार चुनें।
-हेमन्त रिछारिया
-हेमन्त रिछारिया
शनिवार, 15 जून 2013
शरद जोशी प्रसंग
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| स्व. श्री शरद जोशी |
शुक्रवार, 14 जून 2013
रविवार, 9 जून 2013
परमवीरचक्र विजेता श्री योगेन्द्र यादव से भेंट-
![]() |
| परमवीरचक्र विजेता श्री योगेन्द्र यादव |
श्री योगेन्द्र यादव जी के अदम्य साहस का पूर्ण वर्णन यहां देखें-
http://www.bharat-rakshak.com/HEROISM/Yadav.html
शुक्रवार, 7 जून 2013
स्वतंत्र भारत का पहला मंत्रिमण्डल-
१. पं. जवाहरलाल नेहरू-प्रधानमंत्री, विदेश, कामनवेल्थ संबंध
२. सरदार वल्लभभाई पटेल-होम अफेयर, सूचना और प्रसारण, राज्य
३. डा. राजेन्द्र प्रसाद-खाद्य और क्रषि
४. मौलाना अबुल कलाम आज़ाद-शिक्षा
५. डा. जान मथाई-रेल्वे एवं परिवहन
६. सरदार बल्देव सिंह-रक्षा
७. जगजीवन राम-श्रम
८. सी.एच.गामा-वाणिज्य
९. रफी अहमद किदवई-संचार
१०. राजकुमारी अम्रत कौर- स्वास्थ्य
११. डा.बी.आर.अंबेडकर-विधि
१२. आर.के.षणमुख चेट्टी-वित्त
१३. डा.श्यामा प्रसाद मुखर्जी-उद्योग एवं आपूर्ति
१४. एन.वी.गाडगिल-कार्य खदान एवं उर्जा
*** (सरदार वल्लभभाई पटेल २३ अगस्त को उप-प्रधानमंत्री बनाए गए।)
२. सरदार वल्लभभाई पटेल-होम अफेयर, सूचना और प्रसारण, राज्य
३. डा. राजेन्द्र प्रसाद-खाद्य और क्रषि
४. मौलाना अबुल कलाम आज़ाद-शिक्षा
५. डा. जान मथाई-रेल्वे एवं परिवहन
६. सरदार बल्देव सिंह-रक्षा
७. जगजीवन राम-श्रम
८. सी.एच.गामा-वाणिज्य
९. रफी अहमद किदवई-संचार
१०. राजकुमारी अम्रत कौर- स्वास्थ्य
११. डा.बी.आर.अंबेडकर-विधि
१२. आर.के.षणमुख चेट्टी-वित्त
१३. डा.श्यामा प्रसाद मुखर्जी-उद्योग एवं आपूर्ति
१४. एन.वी.गाडगिल-कार्य खदान एवं उर्जा
*** (सरदार वल्लभभाई पटेल २३ अगस्त को उप-प्रधानमंत्री बनाए गए।)
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