बुधवार, 6 सितंबर 2017

पहाड़-पुरूष

         "माउण्टेनमेन" दशरथ माँझी
 हौंसला यदि बुलन्द हो तो पहाड़ भी आपका रास्ता नहीं रोक सकता। इस बात को चरितार्थ करने वाले पहाड़-पुरूष अर्थात् "माउण्टेनमेन" का नाम है- दशरथ माँझी। दशरथ माँझी का जन्म सन 1934 में हुआ। बचपन में ही वे घर से भाग कर धनबाद की कोयला खदानों में काम करने लगे। शादीयोग्य आयु हो जाने पर उनका विवाह फगुनी देवी से हुआ। एक दिन पहाड़ से फ़िसलने के कारण उनकी उनकी पत्नी गँभीर रूप से घायल हो गईं। इलाज के लिए शहर जाना अपेक्षित था किन्तु पहाड़ के कारण शहर का मार्ग अत्यधिक लम्बा था। इसी के चलते समय पर चिकित्सा ना मिल पाने के कारण दशरथ माँझी की पत्नी फगुनी का निधन हो गया। अपनी पत्नी की इस प्रकार हुई मृत्यु ने दशरथ माँझी को विचलित कर दिया। उन्होंने अपने गाँव और शहर के मध्य खड़े विशालकाय पहाड़ को काटकर रास्ता बनाने की ठान ली जिससे गाँव के लोगों को किसी भी आपात स्थिति में शहर पहुँचने में देर ना हो। उन्होंने अकेले ही छैनी-हथौड़े से पहाड़ को काटना शुरू कर दिया। प्रारम्भ में गाँववालों ने उनके इस दुष्कर कार्य का मज़ाक उड़ाया लेकिन माँझी के दृढ़ सँकल्प के आगे वे मौन हो गए। अन्तत: 22 (1960-1983) वर्षों की अनवरत कठोर साधना के पश्चात दशरथ माँझी ने गहलौर गाँव के समीप स्थित पहाड़ को काटकर 110 मीटर लम्बे और लगभग 9 मीटर चौड़े मार्ग का निर्माण कर दिया। उनके इस प्रयास से गया जिले के अतरी और वजीरगंज क्षेत्रों के बीच की दूरी लगभग 40 कि.मी तक कम हो गई। उनकी इस उपलब्धि के उन्हें आज "माउण्टेनमेन" के नाम से जाना जाता है। वर्ष 2006 में बिहार से सरकार ने उनका नाम पद्मश्री पुरुस्कार के लिए प्रस्तावित किया। 26 दिसम्बर 2016  को "बिहार की हस्तियाँ नामक श्रृँखला में इंडिया पोस्ट द्वारा उनके नाम पर एक डाक टिकट जारी किया गया। कैंसर की बीमारी के कारण 17 अगस्त 2007 को 73 वर्ष की आयु में "माउण्टेनमेन" श्री दशरथ माँझी का निधन हो गया।

दशरथ माँझी द्वारा निर्मित मार्ग

                                



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