सोमवार, 14 अगस्त 2017

व्रत या अनशन

जन्माष्टमी कब मनाई जाए इसे लेकर पण्डितों में शीत युद्ध जारी है। विद्वत्तजन धर्मग्रन्थों को खँगाल-खँगालकर अपने-अपने मतों के समर्थन में प्रमाण जुटा रहे हैं। सभी व्रतों के नियम और तिथियों के निर्धारण में ग्रन्थों के माध्यम से प्रमाण स्वरूप अत्यंत क्लिष्ट सँस्कृत के श्लोक इत्यादि प्रस्तुत कर रहे हैं। ठीक भी है, अधिकांश कर्मकाण्डी विद्वानों से और कोई आशा की भी नहीं जा सकती क्योंकि रट्टू तोते की तरह धर्मग्रन्थों को रटना और रटते-रटते बिना समझे अर्थ का अनर्थ करना उनकी आदत है। शास्त्र कभी धार्मिक व्यक्ति की कसौटी नहीं हो सकते। धार्मिक व्यक्ति की कसौटी उसकी ध्यानस्थ अवस्था में हुई अनुभूति एवं उसका विवेक होता है। शास्त्र जब तक इन कसौटियों पर खरा उतरता है; ठीक है, अन्यथा वास्तविक धार्मिक व्यक्ति शास्त्र को इनकार करने का भी सामर्थ्य रखता है। अतीत में ऐसे अनेक बुद्धपुरूष हुए हैं जिन्होंने उस समय के शास्त्रों को इनकार कर दिया जैसे बुद्ध, कबीर, सहजो, दादूदयाल, मीरा, रज्जब, पलटूदास, रैदास आदि। जन्माष्टमी व्रत के सम्बन्ध में ये तथाकथित विद्वान बार-बार व्रत के नियम इत्यादि बता रहे हैं लेकिन क्या यह जानते भी हैं कि व्रत कहते किसे हैं? मेरा इन सभी महानुभावों से कहना है कि केवल भूखे रहने और अन्न ना खाने को व्रत नहीं कहते, यह तो अनशन हुआ। व्रत तो उसे कहते हैं कि जब आप परमात्मा के प्रेम में इस भाँति निमग्न हों कि आपको खाने-पीने की सुध ही भूल जाए, सच्चे अर्थों में व्रत यही है। अब इस प्रकार के प्रेमासिक्त व्रत में तिथि कहाँ बाधक है? भला प्रेम करने के लिए भी कोई नियम या रीति होती है? बाबा पलटूदास कहते हैं- "लगन मुहूरत झूठ सब, और बिगाड़े काम। पलटू शुभ-दिन; शुभ-घड़ी याद पड़ै जब नाम॥" इस प्रकार का हार्दिक व्रत किसी भी दिन किया जाए सफ़ल होता है। वहीं बलात् व दमनपूर्वक भूखा रहने के लिए खूब मुहूर्त्त इत्यादि साध भी लिया जाए तो व्यर्थ है। अत: मेरा सभी देशवासियों से विनम्र निवेदन है कि वे परमात्म प्रीति का भाव साधैं, मुहूर्त्त इत्यादि के फ़ेर में ना उलझें। मुहूर्त्त सधे तो ठीक, ना सधे तो भी ठीक। एक शायर ने क्या खूब कहा है-" सातों दिन भगवान के, क्या मंगल क्या पीर। जिस दिन सोए देर तक, भूखा रहे फ़कीर॥
आप सभी को श्रीकृष्ण जन्माष्टमी की हार्दिक शुभकामनाएँ।
राधे-राधे
-ज्योतिर्विद् पं. हेमन्त रिछारिया
प्रारब्ध ज्योतिष परामर्श केन्द्र

कोई टिप्पणी नहीं: