शनिवार, 20 मई 2017

सरायख़ाना

यहाँ किसका कब हुआ ठिकाना है
ये दुनिया बस इक सरायख़ाना है।

कौन आएगा और जाएगा यहाँ से
रूह को तो आना ना कहीं जाना है।

वो मिला ही है तूने खोया कहाँ है
पाने का तो अच्छा इक बहाना है

मेरी सारी कोशिश यही है दानां
बूँद को समन्दर से अब मिलाना है

-ज्योतिर्विद् पं. हेमन्त रिछारिया

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