शुक्रवार, 12 मई 2017

"ज्योतिष का भ्रामक विज्ञापन ना करें"

आज ज्योतिष से जुड़ी एक ख़बर का विश्लेषण कर रहा था तो बड़े रोचक तथ्य सामने आए। एक प्रतिष्ठित समाचार पत्र में एक तथाकथित ज्योतिषी की विज्ञापननुमा ख़बर प्रकाशित हुई जिसमें उन्होंने यह बताया कि बुद्ध पूर्णिमा के अवसर पर जो ग्रहयोग बने हैं वे 297 वर्ष बाद बने हैं और भविष्य में ये अद्भुत योग कब बनेंगे इसके बारे गणना नहीं की जा सकती। मैं स्तब्ध था कि आख़िर ऐसे कौन से अद्भुत योग बन रहे हैं सो मैंने भी उन योगों के बारे में कुछ जाँच-पड़ताल की जिनके बारे में इन महानुभाव ज्योतिषी ने बताया था। विश्लेषण के पश्चात मैंने पाया कि ऐसे तो कोई बहुत अद्भुत योग नहीं बन रहे हैं जिनके बारे में इस प्रतिष्ठित समाचार पत्र ने ऐसा मीडिया कवरेज दिया। "बुधादित्य योग", "शनि-मंगल" का षडाष्टक योग, सूर्य का उच्चराशिस्थ होना ये सब कोई अद्भुत योग तो नहीं हैं। बहरहाल, जब मैंने उनकी बताए अनुसार 297 वर्ष पूर्व में बन रहे इन योगों की दिनांक जो उनके अनुसार 22 अप्रैल 1720 थी को आधार बनाकर अपना पंचांग परीक्षण किया तो पाया कि उस दिन पूर्णिमा अवश्य थी लेकिन उस दिन इस प्रकार के योग विशेषकर "बुधादित्य योग" जिसे आधार बनाकर यह पूरा विज्ञापन प्रकाशित किया गया था वह बन ही नहीं रहा था और ना ही "शनि-मंगल" का षडष्टक था। मैं आश्चर्यचकित था, मैंने प्रति-परीक्षण के लिए कम्प्यूटर की सहायता ली लेकिन परिणाम वही आया। मेरे देखे किसी भी ज्योतिषी को ज्योतिष का भ्रामक विज्ञापन नहीं करना चाहिए। यदि हम ज्योतिष की प्रतिष्ठा में वृद्धि नहीं कर सकते तो हमें ज्योतिष की प्रतिष्ठा धूमिल करने का कोई अधिकार नहीं है। आज के तकनीकी युग में किसी को बेवकूफ़ बनाना इतना आसान नहीं है। मेरे ऐसे तमाम तथाकथित ज्योतिषियों से आग्रह है कि अपनी थोड़ी सी महत्त्वाकांक्षा की पूर्ती के लिए व्यर्थ व तथ्यहीन बातें बताकर ज्योतिष शास्त्र की प्रतिष्ठा को धूमिल ना करें। आप सब मित्रों की संतुष्टि के लिए मैं अपनी गणना के चित्र भी प्रस्तुत कर रहा हूं आप स्वयं मेरी बातों की प्रामाणिकता देख सकते हैं। जो मित्र कम्प्यूटर इत्यादि का ज्ञान रखते हैं वे स्वयं 22 अप्रैल 1720 कुण्डली साफ़्टवेयर में दर्ज़ कर जन्मपत्रिका बनाकर इन ग्रहयोगों की सच्चाई देख सकते हैं।

-ज्योतिर्विद पं. हेमन्त रिछारिया
प्रारब्ध ज्योतिष परामर्श केन्द्र

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