बुधवार, 19 अप्रैल 2017

वीवीआईपी मानसिकता भी ख़त्म हो

अभी-अभी मोदी सरकार ने वीआईपी कल्चर को ख़त्म करने का आगाज़ करते हुए सभी वीवीआईपी वाहनों से लाल बत्ती हटाने का फ़ैसला लिया। यह एक स्वागत योग्य कदम है लेकिन इतने भर से काम चलने वाला नहीं हमें वीवीआईपी मानसिकता भी ख़त्म करनी होगी। इस देश में जहां अदना सा सरपंच या मण्डल अध्यक्ष अपना पद छोड़ने के बाद भी पूर्व सरपंच या पूर्व मण्डल अध्यक्ष लिखता  है वहां केवल वाहनों पर से लाल बत्ती हटाने से काम नहीं चलेगा। इस देश में वीवीआईपी मानसिकता को ख़त्म करने की पहल होनी चाहिए। यह पहल केवल सरकार नहीं कर सकती सरकार ने तो जो कदम उठाना था वह उठा ही लिया है लेकिन इसमें आम जनता को भी सहयोग करना होगा। आख़िर कौन वे लोग हैं जो इन आम से नेताओं को ख़ास बना देते हैं? ये हम और आप ही हैं जो नेताओं को अपने ख़ास होने का अहसास व आभास कराते हैं। आपने देखा होगा कोई राजनेता या अभिनेता कहीं दिख जाए उसके चरण-चुम्बन व सेल्फ़ी लेने की होड़ सी लग जाती है। उसके आस-पास कई लोग स्वयं ही उसके सुरक्षाकर्मियों की भूमिका अदा करने लग जाते हैं। ऐसा क्यों होता है? ऐसा दो कारणों से होता है पहला तो इसलिए होता है कि हम उस प्रतिष्ठित व्यक्ति को आधार बनाकर अपना अहंकार तुष्ट करना चाहते हैं, दूसरा हम उस नेता की नज़र में उसके ख़ास बनना चाहते हैं जिससे हमारे दैनिक जीवन के समस्त नैतिक-अनैतिक कार्यों में बाधा ना पड़े। वाहनों पर लगी लाल बत्ती को त्वरित हटाना सम्भव था, जो कर दिया गया है लेकिन हमारे समाज में व्याप्त इस "अति-महत्त्वपूर्ण व्यक्ति संस्कृति" (वीवीआईपी कल्चर) को हटाना शायद इतना आसान ना होगा। समाज में फ़ैली इस कुव्यवस्था को तभी हटाया जा सकता है जब आम नागरिक अपने स्वार्थ पर अंकुश लगा कर राष्ट्रहित के बारे सोचें। इस दिशा में हुई एक सकारात्मक पहल का हमें स्वागत करना चाहिए।

-ज्योतिर्विद पं. हेमन्त रिछारिया

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