रविवार, 30 अप्रैल 2017

अर्ज़ किया है...


(१) "मैं परेशां हूं हमने आधा कश्मीर हारा क्यों
    लोग परेशां है कटप्पा ने बाहुबली मारा क्यों"

(२) "ये कोई सियासी भूल सा लगता है
    वो संग फ़ेके तो फ़ूल सा लगता है"

(३) "मन्दिर-मस्ज़िद पे सियासत उन्हें चमकानी है
    हमें तो साहब अपने चूल्हे की आग जलानी है"

(४) "शाह-औ-मुफ़लिस का फ़र्क कैसे मिटता
    ए कज़ा तूने सब बराबर कर दिया"

-ज्योतिर्विद पं. हेमन्त रिछारिया

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