बुधवार, 1 मार्च 2017

"प्रधानमन्त्री" या "स्टार प्रचारक"...!

आज कोई भी न्यूज़ चैनल देखिए आपको किसी ना किसी चैनल पर हमारे प्रधानमन्त्री जनसभा को सम्बोधित करते हुए मिल जाएंगे। मेरे देखे प्रधानमन्त्री को वाचाल नहीं होना चाहिए। प्रधानमन्त्री पद की एक गरिमा होती है। यदि देश का प्रधानमन्त्री इस प्रकार पार्टी का स्टार प्रचारक मात्र बनकर रह जाएगा तो यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण होगा। प्रधानमन्त्री देश का होता है पार्टी का नहीं, उसे उस पद की गरिमा का ध्यान रखना चाहिए। यह कोई आम चुनाव नहीं हैं, यह राज्यों के चुनाव हैं इनमें यदि प्रधानमन्त्री इस प्रकार प्रचार कर रहें हैं तो यह चिन्ता का विषय है। क्या राज्य में बीजेपी का कोई बड़ा नेता या प्रदेश संगठन का कोई ऐसा नेता नहीं है जो इन चुनावों की कमान संभाल सके? प्रधानमन्त्री की जनसभाएं बड़ी सीमित और गरिमामय होनी चाहिए क्योंकि जब इस प्रकार अत्यधिक सभाएं व भाषण होते हैं तो वाणी का स्तर स्वयमेव ही गिर जाता है। हमारे प्रधानमन्त्री ने राज्यों में इस प्रकार अत्यधिक प्रचार करके वहां के मुख्यमन्त्री पद के उम्मीदवारों का कद अनजाने में ही बड़ा कर दिया। आप महसूस कर रहे होंगे कि इन दिनों बीजेपी मोदीमय हो चुकी है। एक पुरानी कहावत के परिप्रेक्ष्य में कहें तो "ना ख़ाता ना बही, जो मोदी कहें वही सही"। बीजेपी में मोदी ने अपना कद इतना बढ़ा लिया है कि कोई दूसरा नेता जन्मने ही नहीं पा रहा। शायद मोदी स्वयं इस बात से अनजान हैं कि उनका यह कार्य संघ की विचारधारा के विपरीत है। आज नहीं तो कल बीजेपी को उनके इस बढ़े कद का खामियाज़ा भुगतना ही पड़ेगा।

-ज्योतिर्विद पं. हेमन्त रिछारिया

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