सोमवार, 12 दिसंबर 2016

"कुबेर" नहीं "अर्थपिशाच" कहिए

अभी-अभी एक न्यूज़ चैनल पर खबर देखी कि एक वकील का कालधन पकड़ाया। खबर के तथाकथित विद्वान सम्पादक ने खबर का शीर्षक किया "कालेधन के कुबेर"....ऐसी ही यदि कहीं कोई कुकृत्य करता पाया जाता है तो उस खबर का शीर्षक देते हैं....."रासलीला"। मुझे इस प्रकार के शीर्षकों से सख़्त आपत्ति है मैं इस प्रकार की शब्दावली की कड़ी निन्दा करता हूं। हिन्दू धर्म के सहिष्णु होने का यह तो अर्थ नहीं कि उनके आराध्य को चाहे जिसके साथ सम्बद्ध कर दें। हिन्दू धर्म में कुबेर खज़ाने अर्थात धन का अधिपति व रक्षक माना गया है। मैं इन ख़बरनबीसों से पूछना चाहता हूं क्या कुबेर के खजाने का धन कालाधन था? ऐसे ही क्या "रासलीला" कोई व्यभिचार कर्म था? यदि नहीं तो इस प्रकार के कुकृत्यों के साथ ऐसे पवित्र प्रतीकों को क्यों सम्बन्धित किया जाता है और कोई शंकराचार्य आवाज़ नहीं उठाता, कोई पंडित मौन नहीं तोड़ता। इस प्रकार के कालेधन के स्वामियों को नाम ही देना है तो इन्हें "अर्थपिशाच" कहिए कुबेर कहकर क्यों हिन्दू धर्म का अपमान करते हैं। मैं पुन: इस प्रकार की शब्दावली की घोर भर्त्सना करता हूं।
-ज्योतिर्विद पं. हेमन्त रिछारिया

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