शनिवार, 10 दिसंबर 2016

हम "कैशलेस" से पहले "कैरेक्टर लैस" ना हो जाएं

यदि आप अपने १०० परिचितों और मित्रों से पूछें कि आपके घर एलसीडी है तो लगभग सभी का जवाब "हां" होगा। आप उन्हीं मित्रों से पुन: पूछें कि आपके घर में फ्रिज,एसी,वाशिंग मशीन, माइक्रोवेब, कम्प्यूटर,दुपहिया वाहन इत्यादि है? तो भी जवाब बहुमत से "हां" में ही मिलेगा। मेरे कहने का आशय है कि विलासिता से जुड़ी किसी भी वस्तु के बारे में आप अपने मित्रों और परिचितों से पूछें तो जवाब ९९ फ़ीसदी "हां" में ही आएगा लेकिन जब इन्हीं १०० मित्रों और परिचितों से आप पूछेंगे कि आपके घर में आपका अपना निजी पुस्तकालय है? चलिए पुस्तकालय को छोड़िए बस इतना पूछ लीजिए कि आप इन दिनों कौन सी पुस्तक पढ़ रहे हैं? तो ९९.९९ फ़ीसदी का जवाब "ना" में आएगा। मेरे देखे यह गंभीर चिन्ता का विषय है। आज हम पुस्तकों से दूर होते जा रहे हैं। आज की युवा पीढ़ी में पुस्तकों के प्रति कोई रुझान ही नहीं है ऐसे में वे अपने देश की साहित्यिक विरासत को क्या समझेंगे। कहीं ऐसा ना हो कि "कैशलेस" होने से पहले भारत "कैरेक्टर लैस" हो जाए। यदि इसे रोकना है तो अपने घर में विलासिता की वस्तुओं के साथ-साथ एक छोटा सा पुस्तकालय अवश्य बनाईए।

-ज्योतिर्विद पं. हेमन्त रिछारिया

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