गुरुवार, 6 अक्तूबर 2016

"आंख तो फ़ूटी अंजन काहे"

कल राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शस्त्र पूजा का कार्यक्रम में जाने सुअवसर प्राप्त हुआ। मैंने वहां खेल रहे कुछ बच्चों से बातचीत की तो एक ऐसी घटना हुई जिससे मन बहुत आहत हो गया। घटना कुछ इस प्रकार है कि- मैंने वहां एक लड़के (जिसकी आयु ९-१० वर्ष की होगी) से पूछा कि तुम्हारा नाम क्या है तो फ़र्राटेदार अंग्रेजी में बोला- My Name is Varun. यह सुनते ही मैंने उसे कहा कि बेटा अब यही बात हिन्दी में बोलो तो उसने इसे कुछ इस अंदाज़ में कहा- मेरा नाम हेगा बरुन। यह सुनकर मैं आहत हो गया मैंने वहां संघ के एक पदाधिकारी से कहा कि देखिए यह मैकाले की शिक्षा पद्धति का दुष्परिणाम। इसीलिए हमारे शास्त्र कहते हैं "आंख तो फ़ूटी अंजन काहे"।

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