शुक्रवार, 5 अगस्त 2016

भारत का "भरत" कौन...!

भारतवर्ष में जन्म लेने वाले हर हिन्दू अभी तक यही मान्यता रही है कि भारत का नाम दुष्यंत-शकुन्तला के पुत्र "भरत" पर रखा गया है, लेकिन यह सच नहीं है। चौंकिए मत...ऐसा दावा किया है श्री लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय संस्कृत विद्यापीठ, नई दिल्ली के सहायकाचार्य डा. अनेकान्त कुमार जैन ने, जिनका मानना है कि भारतवर्ष का नाम दुष्यंत-शकुन्तला के पुत्र "भरत" पर नहीं बल्कि ऋषभदेव के प्रथम पुत्र चक्रवर्ती सम्राट "भरत" के नाम पर पड़ा है। इस बात के समर्थन में डा. जैन कई तथ्य प्रस्तुत करते हैं। उनका मानना है कि आधुनिक शोधों के परिणाम से स्पष्ट है कि जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर ऋषभदेव के प्रथम पुत्र चक्रवर्ती सम्राट "भरत" के नाम पर ही इस देश का नाम "भारत" पड़ा है और इससे पूर्व ऋषभदेव के पिता "नाभिराय" के नाम पर इस देश का नाम "अजनाभवर्ष" था। डा. जैन के अनुसार पुराणों में दर्जनों श्लोक ऐसे हैं जो यह सिद्ध करते हैं कि ऋषभदेव के पुत्र "भरत" के नाम पर ही इस देश का नाम "भारत" पड़ा है। दरअसल भरत के नाम से चार प्रमुख व्यक्तित्व भारतीय परम्परा में जाने जाते हैं।
१. तीर्थंकर ऋषभदेव के प्रथम पुत्र चक्रवर्ती सम्राट भरत
२. राजा रामचन्द्र के अनुज भरत
३. राजा दुष्यन्त के पुत्र भरत
४. नाट्यशास्त्र के रचयिता भरत
डा. जैन के मतानुसार इन चारों विकलों में केवल प्रथम विकल्प के ही शिलालेखीय तथा शास्त्रीय साक्ष्य प्राप्त हैं। अग्निपुराण में स्पष्ट लिखा है-
"ऋषभो मरूदेव्यां च ऋषभाद् भरतोऽभवत्।
ऋषभोऽदात् श्री पुत्रे शाल्यग्रामे हरिंगत:,
भरताद् भारतं वर्ष भरतात् सुमतिस्त्वभूत॥"
वहीं स्कन्द पुराण के अनुसार-
"नाभे: पुत्रश्च ऋषभ ऋषभाद भरतोऽभवत्।
तस्य नाम्ना त्विदं वर्षं भारतं चेति कीर्त्यते॥"
(माहेश्वर खण्ड)
ऐसा ही उदाहरण मार्कण्डेय पुराण में भी मिलता है। डा. जैन, डा. वासुदेव शरण अग्रवाल की पुस्तक "मार्कण्डेय पुराण का अध्ययन" का उल्लेख करते हुए कहते हैं जिसमें डा. वासुदेव शरण अग्रवाल ने अपनी भूल स्वीकारते हुए लिखा है कि-"मैंने अपनी "भारत की मौलिकता" नामक पुस्तक में दौषयन्ति-भरत से "भारतवर्ष" लिखकर भूल की थी, इसकी ओर कुछ मित्रों ने मेरा ध्यान आकर्षित किया उसे अब सुधार लेना चाहिए।"
कुछ विद्वान भी इस तथ्य से अपरिचित होंगे कि आर्यखण्ड रूप इस भारतवर्ष का एक प्राचीन नाम "नाभिखण्ड" या "अजनाभवर्ष" भी इन्हीं ऋषभदेव के पिता अजनाभ के नाम से प्रसिद्ध था। नाभिराज का एक नाम "अजनाभ" भी था। श्रीमदभागवत (५/७/३) में कहा है कि-
"अजनाभं नामैतदवर्षभारतमिति यत आरभ्य व्यपदिशन्ति।"
प्रसिद्ध साहित्यिक पत्रिका "हंस" के अक्टूबर २००२ के अंक के अतिथि सम्पादक प्रेमकुमार मणि के सम्पादकीय में भी उल्लेख मिला है कि मिथकीय कथा के अनुसार भारत का नाम दुष्यन्त-शकुन्तला के पुत्र भरत के नाम पर पड़ा"। डा. अनेकान्त जैन के द्वारा प्रस्तुत तथ्य और ऐतिहासिक प्रमाणों से भले यह बात पूर्णरूपेण सिद्ध ना होती हो कि भारतवर्ष का नाम ऋषभदेव के प्रथम पुत्र "भरत" के नाम पर पड़ा किन्तु उनके तर्कों से भारत का नाम दुष्यन्त-शकुन्तला के पुत्र "भरत" पर पड़ा इस बात पर संदेह अवश्य होता है।

-(साभार-वैचारिकी जुलाई-अगस्त २०१२, पेज न.९६)
- सन्दर्भ: ("किस भरत का भारत" लेखक- डा. अनेकान्त कुमार जैन)

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