गुरुवार, 8 जनवरी 2015

जीवन-दान


क्या आप जानते हैं कि एक मौत नौ लोगों को ज़िंदगी दे सकती है? चिकित्सा विज्ञान (मेडिकल साइंस) के अनुसार जिस व्यक्ति का मस्तिष्क नाकाम (ब्रेन डेड) हो गया हो लेकिन शरीर के दूसरे अंग काम कर रहे हों, उसके परिजन मरीज के पेनक्रियाज़,किडनी,आंखे (कार्निया),हार्ट,लीवर एवं बोनमेरो जैसे अंगों का दान कर अतिगंभीर हालत वाले मरीजों को नया “जीवनदान” दे सकते हैं। ब्रेन डेड व्यक्ति वह होता है जो वेंटिलेटर पर है जिसकी सांसे चल रही हैं, दिल धड़क रहा है और रक्त संचार चालू है। हमारे देश में प्रति दस लाख में से सिर्फ़ १६ लोग ही अंगदान करते हैं। आंकड़ों के मुताबिक हर साल देश में लगभग डेढ़ लाख लोग सड़क दुर्घटनाओं में अपनी जान गंवाते हैं। डाक्टरों के अनुसार हादसे,हार्ट-अटैक और ब्रेन स्ट्रोक के मामलों में अंगदान की संभावना सौ फ़ीसदी तक रहती है। ऐसे में लोगों के परिजन स्वीकृति दें या फ़िर वे लोग पहले से ही अंगदान के पंजीकृत हों तो ज़रूरतमंद लोगों को नया जीवन मिल सकता है। एक व्यक्ति मृत्योपरांत अपने अंगदान से नौ लोगों को “जीवनदान” दे सकता है। चिकित्सकों का कहना है कि ब्रेन डेड व्यक्ति के अंगदान की समस्त प्रक्रिया (आर्गन रिट्राइल) २४ घंटों के भीतर हो जानी चाहिए। जिसमें काउंसलिंग कमेटी व डाक्टर को सूचना एवं ओटी में प्रवेश आदि शामिल हैं। यदि अंगदान के लिए सामाजिक जागृति लाने हेतु विभिन्न स्तरों प्रयास किया जाता है तो कई व्यक्ति इससे लाभान्वित हो सकते हैं।
(स्वतंत्र वार्ता-हैदराबाद से साभार)

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