मंगलवार, 6 जनवरी 2015

पुरी में मनेगा “नवकलेवर उत्सव”-

जगन्नाथ पुरी में इस वर्ष २०१५ आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया को रथयात्रा के साथ “नवकलेवर उत्सव”भी मनाया जाएगा। पुराने काष्ठ निर्मित विग्रहों को समाधि देकर नवीन विग्रहों के निर्माण एवं प्राण-प्रतिष्ठा “नवकलेवर उत्सव” कहा जाता है। यह “नवकलेवर” जिस वर्ष आषाढ़ का अधिक मास (जो कि सामान्यतः ८ व १९ वर्षों के अंतराल पर होता है) आने पर मनाया जाता है। इस उत्सव में दारू वृक्ष के काष्ठ से निर्मित नवीन विग्रहों का निर्माण व उनकी प्राण-प्रतिष्ठा की जाती है। पुराने विग्रहों को मन्दिर परिसर में ही “कोयली वैकुण्ठ” नामक स्थान पर समाधि दे दी जाती है। पूर्व में यह उत्सव वर्ष १९९६ में मनाया गया था।

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