गुरुवार, 11 दिसंबर 2014

नाथूराम गोडसे कौन?


नाथूराम गोडसे
भाजपा सांसद साक्षी महाराज के नाथूराम गोडसे को राष्ट्रभक्त कहने पर राज्य सभा में खूब हंगामा हुआ। विपक्षी दलों का कहना था कि नाथूराम गोडसे गांधी जी का हत्यारा वह राष्ट्रभक्त नहीं हो सकता। मेरे देखे सिर्फ़ हत्या के कारण ही यदि कोई हत्यारा करार दिया जाता है तो फ़ांसी भी एक प्रकार की हत्या ही है और सेना द्वारा सीमा पर की जाने वाली कार्रवाई, पुलिस कार्रवाई ये सब भी हत्या ही हैं लेकिन इस प्रकार की कार्रवाई को मूर्तरूप देने वालों को हम कभी भी हत्यारा नहीं कहते। जहां तक नाथूराम गोडसे का प्रश्न है तो जिन लोगों ने भी “गांधी वध क्यों?” पढ़ी है वे सब निश्चित ही नाथूराम गोडसे को हत्यारे की श्रेणी में रखना कभी भी स्वीकार नहीं करेंगे। यहां मैं दो बातों का उल्लेख करना चाहूंगा- पहली नाथूराम गोडसे ने कही है और दूसरी उन्हें फ़ांसी की सजा देने वाले जस्टिस खोसला ने, ये दोनों बातें पाठकों को किसी निष्कर्ष पर पहुंचने में सहायता करेंगी है ऐसा मेरा विश्वास है।

“नाथूराम का वक्तव्य न्यायालय में उपस्थित दर्शकगण के लिए एक आकर्षक वस्तु थी। खचाखच भरा न्यायालय इतना भावाकुल हुआ था कि उनकी आहें और सिसकियां सुनने में आतीं थीं और उनके गीले-गीले नेत्र और गिरने वाले आंसू दिखाई देते थे। न्यायालय में उपस्थित उन प्रेक्षकों को यदि न्यायदान का कार्य सौंपा जाता तो मुझे तनिक भी संदेह नहीं है कि उन्होंने अधिक से अधिक संख्या में यह कहा होता कि नाथूराम निर्दोष है।”
-जस्टिस खोसला
(द मर्डर आफ महात्मा-पेज नं.- २३४)
(गांधीवध क्यों?- पेज नं.- ४८) से साभार

“यदि देशभक्ति पाप है तो मैं मानता हूं कि मैंने पाप किया है। यदि प्रशंसनीय है तो मैं अपने आपको उस प्रशंसा का अधिकारी समझता हूं। मुझे विश्वास है कि मनुष्यों द्वारा स्थापित न्यायालय के ऊपर कोई न्यायालय हो तो उसमें मेरे काम को अपराध नहीं समझा जाएगा। मैंने देश और जाति की भलाई के लिए यह काम किया। मैने उस व्यक्ति पर गोली चलाई जिसकी नीति से हिन्दुओं पर घोर संकट आए, हिन्दू नष्ट हुए।”
-नाथूराम गोडसे
अब गोडसे राष्ट्रभक्त हैं या हत्यारा... इस बात को हम इस सबसे बड़े लोकतंत्र के अधिनायक इस देश की जनता पर छोड़ते हैं।
-संपादक

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