मंगलवार, 7 अक्तूबर 2014

अर्ज़ किया है...


“सुनकर जमाने कि बाते, तु अपनी अदा मत बदल
 यकीन रख अपने खुदा पर, यूँ बार बार खुदा मत बदल।”

“जिस नजाकत से ये लहरें मेरे पैरों को छूती हैं,
 यकीन नहीं होता इन्होने कभी कश्तियाँ डुबोई होंगी।”

“बहुत दूर तक जाना पड़ता है,
 सिर्फ यह जानने के लिए, नज़दीक कौन है।”

“झूठ अगर यह है कि तुम मेरे हो,
 यकीं मानो,मेरे लिए सच का कोई मायना नहीं।”

“वो दोस्त मेरी नजर में बहुत मायने रखते हैं,
 वक़्त आने पर सामने मेरे जो आइने रखते हैं।”

“मौत का भी यकीन है उनपर भी ऐतबार है,
 देखते हैं पहले कौन आता है हमे तो दोनों का इंतजार है।”

“हमारे दिल की मत पूछो बड़ी मुश्किल में रहता है,
 हमारी जान का दुश्मन हमारे दिल में रहता है।”

“गुमनाम है लोग वतन पर जान देने वाले,
 यहाँ लोग तो थपड खाकर मशहूर हो जाते है।”

“आग लगाना मेरी फितरत में नही है,
 मेरी सादगी से लोग जलें तो मेरा क्या कसूर।”

“मयखाने में आऊंगा ,मगर पिऊंगा नहीं साकी
 ये शराब मेरे गम भुलाने की औकात नहीं रखती।”

कहां ज़रूरत है हाथ में पत्थर उठाने की
तोड़नेवाले तो दिल ज़ुबां से तोड़ देते है....

(सभी अशआर बराए-मेहरबानी)

“एक तुम्हारा होना क्या से क्या कर देता है
 बेजान छ्त; दीवारों को घर कर देता है।”
-महेश्वर
 

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