शनिवार, 26 जुलाई 2014

घड़ी वाले कान्हा-


घड़ी वाले कान्हा
गुजरात के मंदिर में स्थापित यह मूर्ती कृष्ण पाषाण (काले पत्थर) से निर्मित है और ५०० वर्ष पूर्व की बताई जा रही है। इस मूर्ती के बाएं हाथ में एक घड़ी बंधी हुई है। ऐसा बताया जा गया है कि यह घड़ी बिना किसी बैटरी के मानवीय नब्ज़ के आधार पर चलती है। यह एक अंग्रेज ने मूर्ती का मखौल उड़ाते हुए यह कहते हुए बांधी थी कि यदि मूर्ती में प्राण है तो यह घड़ी चलेगी और घड़ी मूर्ती के हाथ में बांधते ही चल पड़ी। ऐसा बताया जा रहा है आज भी यह घड़ी चल रही है और जब ठाकुर जी के अभिषेक-स्नानादि के समय इसे उतारते हैं तो यह बंद हो जाती है फिर श्रृंगार के साथ जब इसे विग्रह पर बांधा जाता है तो पुनः चल पड़ती है।
(यह अभी तक सिर्फ़ किंवंदती ही है। हम उक्त बात की प्रामाणिकता का दावा नहीं करते)

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