बुधवार, 23 अप्रैल 2014

“भद्रा” करेगी मोदी की राह आसान

आज सभी की निगाहें बनारस की ओर लगी हुई हैं। बनारस से आज भाजपा के प्रधानमंत्री पद के दावेदार नरेन्द्र मोदी नामांकन भरने वाले हैं। हिन्दू शास्त्रों के अनुसार यदि सिर्फ़ शुद्ध मुहूर्त ही साध लिया जाए तो कुण्डली कुयोग आधे से अधिक तक निष्प्रभावी हो जाते हैं और अभीष्ट की सिद्धि होती है किंतु काशी के विद्वान ज्योतिषियों ने आज के दिन को नामांकन के लिए शुभ नहीं माना है, क्योंकि आज “भद्रा” है। ज्योतिष शास्त्रानुसार “भद्रा” एक बहुत ही अशुभ योग होता है जिसमें किए गए समस्त कार्य सदा निष्फ़ल हो जाते हैं। यही कारण है कि कल अनेक न्यूज़ चैनलों पर आज के दिन मोदी के नामांकन भरने को लेकर चर्चा होती रही। काशी के एक विद्वान ज्योतिषी ने तो यहां तक कह दिया कि मोदी को ज्योतिष पर विश्वास नहीं है और वे इसकी उपेक्षा करने के लिए ही इस दिन नामांकन दाखिल करने जा रहे हैं, बहरहाल यह सत्य कि आज “भद्रा” है परन्तु ज्योतिष के विद्वान अध्येयताओं को यह पता होना चाहिए कि आज “उत्तरार्द्ध” की भद्रा है;ना कि “पूर्वाद्ध” की। “उत्तरार्द्ध” की भद्रा रात्रि में त्याज्य होती है जबकि “पूर्वाद्ध” की भद्रा दिन में, इसके विपरीत “उत्तरार्द्ध” की “भद्रा” दिन में सभी कार्यों में प्रशस्त होती है और “पूर्वाद्ध” की रात्रि में। शास्त्रानुसार “भद्रा” में समस्त शुभ कार्य वर्जित होते हैं किंतु समस्त क्रूर कार्य जैसे शत्रु पर आक्रमण,शत्रु वध,मारण, उच्चाटन आदि “भद्रा” में ही शुभ होते हैं इस दृष्टि से भी आज का दिन नामांकन के लिए शुभ है। वैसे भी “भद्रा” के मुख की ५ घटियां अर्थात् २ घंटे ही त्याज्य होते है “भद्रा” का पृष्ठ भाग कार्यों में सफलता दिलाता है। अतः यदि मोदी की कुण्डली के कुयोगों की शांति होती है तो “भद्रा” मोदी की राह बहुत हद तक आसान कर देगी।
-ज्योतिर्विद हेमन्त रिछारिया

शनिवार, 19 अप्रैल 2014

मीडिया का दोहरा मापदंड

आज शाम एक राष्ट्रीय न्यूज़ चैनल पर मनसे प्रमुख राज ठाकरे का साक्षात्कार देख रहा था। जिसमें मनसे प्रमुख ने  साक्षात्कार लेने वाले चैनल के एडिटर-इन-चीफ़ का कई बार अपमान किया। उनके इस बर्ताव पर हर बार संपादक महोदय सिटपिटा कर रह गए। हद तो तब हो गई जब एक सवाल का जवाब देने से पूर्व राज ठाकरे ने खुले तौर पर कहा कि-“आप भौंक चुके”, इस पर भी संपादक महोदय निर्लज्जता से शांत रह गए। इस घटना की ना तो उस चैनल ने और ना ही किसी अन्य मीडिया समूह ने निंदा की। ना ही मनसे प्रमुख के संपादक के साथ किए इस दुर्रव्यवहार की खबरें चलाईं। वहीं कुछ दिनों पूर्व नरेन्द्र मोदी द्वारा अंग्रेजी अखबार को दिये गए साक्षात्कार के दौरान तथाकथित "पपी" (कुत्ते) वाले मुहावरे को लेकर मीडिया में खूब खबरें चलीं। उनके इस बयान की कड़ी निंदा की गई जबकि उस साक्षात्कार को लेने वाले पत्रकार ने स्वयं ये ट्वीट करके सफाई दी थी कि मोदी के बयान को गलत तरीके से पेश किया जा रहा जबकि उन्होंने वह बयान मुहावरे के तौर पर दिया था। मीडिया के इस दोहरे मापदंड के पीछे क्या राज़ है? ज़रा सोचिए....!

गुरुवार, 17 अप्रैल 2014

ग़ज़ल

ना आहो-फुगां; ना गम लिख रहा हूं
मैं इन दिनों बहुत कम लिख रहा हूं

मुहब्बत;वफ़ा;दोस्ती;कस्मे-वादे
ये तो जहां के भरम लिख रहा हूं

नये दौर के कुछ नये हैं सलीके
आंखों की मैं शरम लिख रहा हूं

कैसी कमी देखो कागज़ की आई
सियासतदां का सितम लिख रहा हूं

वो कहते हैं बेवफ़ा मुझको अक्सर
मैं अब भी उनको सनम लिख रहा हूं

वो लिख रहे हैं शिकस्त आंधियों की
मैं हथेली के अपने ज़खम लिख रहा हूं

-हेमन्त रिछारिया

रसखान के स्याम जू

सेस;गनेस;महेस;दिनेस;सुरेसहु;जाहि निरंतर गावै।
जाहि अनादि;अनंत;अखंड;अछेद;अभेद;सुबेद बतावै॥
नारद से सुक व्यास रहे पचिहारे तु पुनि पार ना पावै।
ताहि अहीर की छोहरियां छछिया भर छाछ पे नाच नचावै॥

धूरि भरे अति सोहत स्याम जू तैसी बनी सिर सुन्दर चोटि।
खेलत खात फिरे अंगना पग पैंजनी बाजति पीरी कछोटि॥
वा छवि को "रसखान" बिलोकत वारत काम कलानिधि कोटी।
काग के भाग बड़े सजनी हरि हाथ सौं ले गयो माखन रोटी॥

या लकुटि अरु कामरिया पर राज तिहूं पुर को तजि डारौं।
आठहुं सिद्धि;नवौं निधि को सुख नंद की धेनु चराय बिसारौं॥
"रसखान" कबौं इन आंखन सौं ब्रज के बन बाग तडा़ग निहारौं।
कोटिक हूं कलधौत के धाम करील के कुंजन ऊपर वारौं॥


मानुस हौं तो वही "रसखान" बसौ मिलि गोकुल गांव के ग्वारन।
जों पशु हौं तो कहां बस मेरौ, चरौ नित नंद की धेनु मंझारन॥
पाहन हौं तो वही गिरि को जो धरयो कर छत्र पुरंदर कारन।
जो खग हों तो बसेरो करौं मिलि कालिंदी कूल कदम्ब की डारन॥