सोमवार, 27 जनवरी 2014

सोलह श्रृंगार


सोलह श्रृंगार की चर्चा तो आप सभी ने सुनी ही होगी लेकिन क्या आप जानते हैं कि वे सोलह श्रृंगार कौन से हैं, यदि नहीं तो हम आपको बताते हैं। सोलह श्रृंगार निम्न हैं-
अंगशुचि,मंजन,वसन,मांग,महावर,केश।
तिलक भाल,तिल चिबुक में,भूषण मेंहदी वेश।
मिस्सी,काजल,अरगजा,वीरी और सुगंध॥
अर्थात् शरीर पर उबटन लगाना,स्नान करना,स्वच्छ वस्त्र धारण करना,मांग भरना,महावर लगाना,बाल संवारना, टीका या बिंदी लगाना,ठोढ़ी पर तिल बनाना,आभूषण धारण करना,मेंहदी रचाना,दांतो में मिस्सी लगाना,आंखों में काजल लगाना, सुगंधित द्रव्य जैसे इत्र लगाना,पान खाना,माला पहनना और हाथों व केश में गजरा धारण करना।

बुधवार, 22 जनवरी 2014

एक अभिशाप


बड़ा प्रचलित शेर है कि “लम्हों ने ख़ता की और सदियों ने सज़ा पाई” बदकिस्मती ये अशआर भारतवर्ष के संदर्भ बहुत ही प्रासंगिक हैं। एक भूल आजादी के समय हुई थी जब कांग्रेस और महात्मा गांधी ने मुसलमानों को विशेष दृष्टि से देखने की कोशिश की थी उस समय संघ के संस्थापक डा. हेडगेवार जी ने उनके इस कदम का तीव्र विरोध करते हुए कहा था कि ऐसा करने से मुसलमान और हिंदुओं में खाई पैदा हो जाएगी लेकिन गांधी जी नहीं माने और नतीजा आज सबके सामने है। ठीक वैसी ही एक भूल हमारे आज के नीति-नियंता कर रहे महिलाओं को लेकर, महिला सशक्तीकरण अच्छी बात है लेकिन किस हद तक? हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि “अति सर्वत्र वर्जयेत्”। आज महिलाओं को जो विशेषाधिकार देने की वकालत की जा रही है वह मेरे देख उचित कदम नहीं है समानता तो स्वीकार की जा सकती है परन्तु किसी भी व्यक्ति को विशेषाधिकार देने का मैं समर्थन नहीं कर सकता। वर्तमान में इसके दुष्परिणाम भी धीरे-धीरे सामने आने लगे हैं चाहे वह दहेज का कानून हो, चाहे घरेलू हिंसा, या हरिजन एक्ट हो इन सब कानूनों का किस प्रकार दुरूपयोग किया जा रहा है यह किसी से छिपा नहीं है। ताज़ा मामला देश की राजधानी दिल्ली का है जहां सूबे के कानून मंत्री को एक इलाके में जाकर संदिग्ध महिलाओं पर कार्रवाई करने के लिए पुलिस वालों पर दबाव डालना महंगा पड़ गया। हैरानी की बात तो यह है इस पूरे घटनाक्रम पर अपनी राजनीतिक रोटियां सेंकने वाले दलों में से कोई भी इस पूरे मामले में महिला पुलिस का ज़िक्र तक नहीं कर रहा। क्या महिला पुलिस बस पार्क में बैठे प्रेमी युगलों को दौड़ा-दौड़ाकर पीटने के लिए है? यदि किसी महिला द्वारा अपराध कारित किया गया था या उस महिला द्वारा अपराध कारित करने का शक था तो महिला पुलिस द्वारा कार्रवाई क्यों नहीं की गई? क्या महिलाओं को अपराध के लिए सिर्फ़ इस लिए क्षमादान दे दिया जाएगा कि वे एक महिला है। सारे महिला आयोग कानून मंत्री के पीछे पड़ गए किसी ने भी उन महिलाओं की जांच तक की बात नहीं की जिन पर आरोप लगाए जा रहे थे ऐसा क्यों? यदि इसी तरह का पक्षपातपूर्ण व्यवहार किया जाता रहा तो वह दिन दूर नहीं जब हमारी यही छोटी सी भूल भस्मासुर की तरह हमारी संस्कृति व कानून व्यवस्था के लिए एक अभिशाप साबित होगी।
-हेमन्त रिछारिया

शनिवार, 11 जनवरी 2014

अरविंद केजरीवाल हैं लंबी रेस का घोड़ा


अरविंद केजरीवाल की कुण्डली वृष लग्न एवं वृष राशि की है। लग्नेश एवं राशि स्वामी शुक्र चतुर्थ भाव में केंद्रस्थ हैं। यहां शुक्र को दिग्बल प्राप्त है।चतुर्थ भाव में चतुर्ग्रही योग है।इसी भाव में बुधादित्य योग भी बन रहा है। वाणी के कारक द्वितीयेश बुध एवं गुरू की शुभ युति के कारण केजरीवाल अपनी वाणी के बल पर अतीव प्रसिद्धि प्राप्त कर रहे हैं, वहीं  केंद्र में कुल ५ ग्रह विद्यमान है जिनमें एक उच्चराशिस्थ व एक स्वराशिस्थ है। लग्नेश दिग्बली है। यह एक अत्यंत शुभयोग है। केजरीवाल की कुण्डली में चतुर्थेश जो कि जनता के भाव का स्वामी है स्वराशि में स्थित है वहीं जनता का कारक शनि व्यय भाव में वक्री होकर नीचराशिस्थ है। ज्योतिषीय नियमानुसार यह उच्चफलदायक है जिसके फलस्वरूप केजरीवाल को जनता का असीम प्यार प्राप्त हो रहा है। वहीं तृतीयेश चंद्र केंद्र में उच्चराशिस्थ होकर गुरू से दशम में स्थित होने के कारण “गजकेसरी योग” बना रहा है जिसके कारण केजरीवाल में अति साहस का गुण का परिलक्षित हो रहा है। वहीं पराक्रम भाव में मंगल उनके साहस में वृद्धि कर रहा है। यहां मंगल के नीचराशिस्थ होने व चंद्र के उच्चराशिस्थ होने के कारण “नीचभंग राजयोग” बन रहा है। चतुर्थेश सूर्य के स्वराशि में स्थित होने व शनि के बलवान होने से केजरीवाल का संबंध सदा-सर्वदा जनता से रहा है। वे आंदोलनों से जुड़े रहे हैं। वहीं यह योग उनके राजनीति में या यूं कहें की सार्वजनिक जीवन में होने के भी स्पष्ट संकेत दे रहा है। नवमांश में “रूचक योग” के बनने व लग्न कुण्डली में मंगल की पराक्रम भाव में स्थित होने से केजरीवाल अत्यधिक साहसी हैं वे साहसिक निर्णय लेने में ज़रा भी संकोच नहीं करते चाहे वह उच्च पद से त्यागपत्र देने का मामला हो या नए दल के गठन कर चुनावी में राजनीति में भाग्य आज़माने का। केजरीवाल की कुण्डली में चतुर्थेश सूर्य नवमांश में उच्चराशिस्थ हैं यह योग भी जनता से संबंध, प्यार एवं सत्ता का संकेत दे रहा है। सत्ता के कारक सूर्य-राहु-शनि व जनता के कारक शनि की कुण्डली में अत्यंत शुभ स्थित यह स्पष्ट संकेत दे रही है कि अरविंद केजरीवाल भारतीय राजनीति के लंबी रेस के घो़ड़े साबित हो सकते हैं किंतु इन शुभ योगों के साथ ही केजरीवाल की कुण्डली में   विषाक्त नामक “कालसर्प योग” भी उपस्थित है। यह एक अशुभ योग है जिसके कारण केजरीवाल को जीवन में कड़ा संघर्ष करना पड़ेगा। कई बार वे उपलब्धियां प्राप्त करते-करते रह जाएंगे। यद्यपि कुण्डली में उपस्थित कई शुभ योगों, राजयोग एवं केन्द्रस्थ गुरू की उपस्थिति से “कालसर्प योग” के दुष्प्रभावों में कमी आएगी किंतु अपेक्षित सफलता प्राप्ति  के लिए उन्हें कड़ा संघर्ष करना ही पड़ेगा। राहु की महादशा-अंतर्दशा उनके लिए लाभकारी सिद्ध होगी। एकादश स्थानगत राहु राजयोग कारक होता है। इसकी दशा-अंतर्दशा उन्हें सत्ता के केन्द्र में स्थापित करने वाली होगी। केजरीवाल इस समय गुरू की महादशा एवं ल़ग्नेश शुक्र की अंतर्दशा के प्रभाव में है। गुरू उनकी कुण्डली में “गजकेसरी” योगकारक होकर लाभस्थ राहु अधिष्ठित राशि का स्वामी है वहीं शुक्र जनता के भाव चतुर्थ में चंद्र अधिष्ठित राशि का स्वामी होकर स्थित है जिसके फस्वरूप उन्हें जनता का असीम स्नेह व सत्ता प्राप्त होगी। यह दशा २०१५ तक रहेगी। इसके बाद आनेवाली दशाएं भी उनके लिए अनुकूल हैं। निष्कर्ष के रूप में यह कहा जा सकता है कि अरविंद केजरीवाल आने वाले दिनों में  मुख्यमंत्री, नेता प्रतिपक्ष, केंन्द्रीय मंत्री, जैसे उच्च पदों  को ग्रहण करेंगे बल्कि यह कहना अतिश्योक्ति नहीं होगी कि वे एक दिन भारतीय लोकतंत्र के सर्वोच्च पद पर आसीन हो जाएं।
(उपर्युक्त फलादेश उपलब्ध कुण्डली का है जो अरविंद केजरीवाल की बताई गई है। हम इसकी प्रामाणिकता के बारे में कोई दावा नहीं करते।)
-हेमन्त रिछारिया
(ज्योतिर्विद,ज्योतिष प्रभाकर)