मंगलवार, 15 अक्तूबर 2013

चुनावी माहौल

एक बार देखी हमने श्वानों की लडा़ई
हड्डी एक थी किंतु सबने उसपर नज़र गड़ाई
एक गुर्राया; दूजे ने पंजा बढ़ाया; तीसरा काटने को आतुर,
हड्डी ले भागा वही जो श्वान था सबसे चातुर।

फिर कुछ दिनों के बाद जब चुनाव है आया,
हमारी नज़रों के सामने वही दृश्य दोहराया।
हमने देखी फिर से वही श्वानों की लड़ाई,
हड्डी एक थी किंतु सबने उसपर नज़र गड़ाई।
सुना था कि अपने क्षेत्र में "श्वान" भी "सिंह" होता है,
ये कैसा माहौल है यारों जहां "सिंह" "श्वान" होता है।

-हेमन्त रिछारिया

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